Breaking
Wed. Apr 8th, 2026

मंगल पांडेय के बलिदान दिवस पर संगोष्ठी, युवा पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने पर जोर

जमशेदपुर। बालीगुमा स्थित झारखंड ब्राह्मण शक्ति संघ के आवासीय कार्यालय में बुधवार को देश के प्रथम शहीद और 1857 के सिपाही विद्रोह के नायक मंगल पांडेय के बलिदान दिवस पर एक गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संगठन के पदाधिकारियों और समाज के गणमान्य लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया और स्वतंत्रता संग्राम के इस महान क्रांतिकारी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम की शुरुआत मंगल पांडेय की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर संघ के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. पवन पांडेय, केंद्रीय महासचिव अशोक पांडेय, केंद्रीय उपाध्यक्ष बाला शंकर तिवारी, केंद्रीय सचिव उमलेश पांडेय तथा संजय मिश्रा सहित अन्य पदाधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में मंगल पांडेय के बलिदान को याद करते हुए उनके योगदान को राष्ट्र के इतिहास में मील का पत्थर बताया।

अपने संबोधन में डॉ. पवन पांडेय ने कहा कि मंगल पांडेय ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ जो चिंगारी 1857 में जलाई थी, वही आगे चलकर स्वतंत्रता की प्रचंड अग्नि में परिवर्तित हुई और अंततः देश को 1947 में आजादी मिली। उन्होंने कहा कि उस समय अंग्रेजी शासन के विरुद्ध विद्रोह की कल्पना भी करना कठिन था, लेकिन मंगल पांडेय ने साहस का परिचय देते हुए न केवल विद्रोह किया बल्कि देशवासियों के मन में स्वतंत्रता की भावना भी जागृत की।

उन्होंने आगे कहा कि किसी भी बड़े परिवर्तन की शुरुआत एक छोटे कदम से होती है और मंगल पांडेय का वह पहला कदम ही भारत की स्वतंत्रता की दिशा तय करने वाला साबित हुआ। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अंग्रेजों ने इस विद्रोह के बाद क्रांतिकारियों के प्रति भय के कारण कई कठोर निर्णय लिए और भारतीय सैनिकों के प्रति अपना रवैया बदल दिया।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि स्वतंत्रता संग्राम के नायकों के त्याग और बलिदान की सही जानकारी नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इस क्रम में यह मांग भी उठाई गई कि मंगल पांडेय के जीवन, संघर्ष और बलिदान को स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए, ताकि विद्यार्थी उनके आदर्शों से प्रेरणा ले सकें और देशभक्ति की भावना को आत्मसात कर सकें।

इस अवसर पर मिथलेश दुबे, जितेंद्र मिश्रा, रामानुज चौबे, शैलेन्द्र झा सहित कई अन्य लोग भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जिसमें सभी ने देश के प्रति समर्पण और एकता का संदेश दोहराया।

Related Post