चाईबासा: आदिवासी संथाल समुदाय सहित सभी आदिवासी समाज का प्रमुख प्रकृति पर्व बाहा पर्व के अवसर पर रविवार को चाईबासा के पिल्लई टाउन हॉल मैदान में दिशाेम बाहा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में संथाल समुदाय के लोगों के साथ बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और बच्चे शामिल हुए।
आयोजन समिति के अध्यक्ष जयराम टुडू ने बताया कि बाहा पर्व आदिवासी संथाल समुदाय का एक महत्वपूर्ण प्रकृति पर्व है। इस आयोजन का उद्देश्य उन लोगों को एक मंच पर जोड़ना है जो जिले से बाहर या अन्य राज्यों में रह रहे हैं, ताकि समुदाय के लोग एक साथ मिल सकें और अपनी परंपरा को आगे बढ़ा सकें। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में लगभग 5000 से अधिक लोगों ने भाग लिया।
उन्होंने कहा कि परंपरा के अनुसार नाइके (पुजारी) के द्वारा सारजोम बाहा (सखुआ फूल) और मातकोम बाहा (महुआ फूल) से पूजा-अर्चना की जाती है और प्रकृति को अर्पित किया जाता है। इसके बाद समुदाय के लोग नए फल और फूल का सेवन करते हैं। पर्व के दौरान महिलाएं सखुआ फूल को अपने जुड़े में और पुरुष कान में लगाकर पारंपरिक वेशभूषा और वाद्य यंत्रों के साथ शहर में शोभायात्रा निकालते हैं।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में जगन्नाथपुर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी रफाएल मुर्मू मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि बाहा पर्व आदिवासी समुदाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, क्योंकि आदिवासी समाज प्रकृति की पूजा करता है।
उन्होंने कहा कि इस पर्व के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया जाता है कि प्रकृति के साथ जुड़े रहना मानव जीवन के लिए जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में जिस तरह से प्रकृति का दोहन हो रहा है, वह चिंता का विषय है और सभी को प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक होना चाहिए।
आयोजन समिति के सदस्य सीताराम सोरेन ने कहा कि आदिवासी समाज हमेशा से प्रकृति की पूजा करता रहा है, लेकिन नई पीढ़ी धीरे-धीरे इन परंपराओं को भूलती जा रही है।
ऐसे में जरूरी है कि युवाओं और आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति और प्रकृति के महत्व के बारे में जागरूक किया जाए। उन्होंने बताया कि दिशाेम बाहा का यह छठा आयोजन है और इसे आगे भी लगातार आयोजित किया जाएगा।

