कुड़ू के चंदलासो में दर्जनों एकड़ भूमि में लगे फसलों को रौंदा*
कुडू – लोहरदगा : कुडू प्रखंड के चंदलासो इलाके में एक बार फिर 13 जंगली हाथियों के झुंड आ जाने से ग्रामीणों में भय व दहशत का माहौल बना हुआ है। शुक्रवार की रात हाथियों का समूह गांव में प्रवेश कर गया। ग्रामीणों ने किसी तरह से हाथियों खदेड़ा लेकिन हाथियों ने दर्जन भर किसानों के लगभग 10 एकड़ से अधिक भूमि पर लगे मटर, गेहूं, सरसों, आलू ,बीट, टमाटर आदि फसलों को खाकर व रौंदकर भारी क्षति पहुंचाई। चांदलासो निवासी किसान रामवृत राम ,सूरज मुंडा, श्याम कुमार राम, विनोद राम, विकास कुमार पाल ,अरुण यादव ,पवन कुमार मुंडा आदि के खेतों में लगे फसलों को भारी नुकसान पहुंचा । वन विभाग के क्यूआरटी टीम पहुंचकर ग्रामीणों के सहयोग से हाथियों के झुंड को गांव से रात में बाहर निकलने में सफल रहा। लेकिन हाथियों हाथियों का झुंड चांदलासो से लगभग चार किलोमीटर दूर हेंजला चौक के नजदीक हरैया जंगल में डेरा जमाए हुए था । जिससे आसपास के गांव के लोगों में भय व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों का झुंड दिन भर जंगल में रहने के बाद शाम होते ही नजदीकी गांवों में धावा बोल देते है। जिससे ग्रामीण रातजगा कर घरों का हिफाजत करने को मजबूर हैं।
*मुआवजे पर वन विभाग की उदासीनता, ग्रामीणों में उबाल।*
हाथियों के उत्पात से तबाह किसानों के जख्मों पर मुआवजा भी मरहम नहीं बन पा रहा है। चंदलासो क्षेत्र के ग्रामीणों ने वन विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछली बार हाथियों द्वारा धान की फसल को हुई भारी क्षति का मुआवजा अब तक नहीं दिया गया है। कई किसानों के आवेदन महीनों से विभागीय फाइलों में दबे पड़े हैं।ग्रामीणों का कहना है कि जिन कुछ किसानों को मुआवजा मिला भी है, वह ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है। फसल की वास्तविक क्षति के मुकाबले दी गई राशि बेहद कम है, जिससे किसानों की भरपाई तो दूर, बीज और खाद की लागत भी नहीं निकल पा रही है। आक्रोशित ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हाथियों के लगातार हमलों के बावजूद वन विभाग केवल खानापूर्ति कर रहा है। न तो स्थायी समाधान की पहल हो रही है और न ही समय पर उचित मुआवजा दिया जा रहा है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र मुआवजा भुगतान और हाथियों से सुरक्षा के ठोस इंतजाम नहीं किए गए, तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

