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Wed. Mar 4th, 2026

टाटा लीज नवीनीकरण पर रैयतों और मूल निवासियों का फूटा गुस्सा, डीसी से बोले– हमारे हक की जमीन लौटाई जाए

जमशेदपुर। जिला में टाटा कंपनी के लीज नवीनीकरण से जुड़े मामलों को लेकर शुक्रवार को रैयत, मूल निवासी और विस्थापित उपायुक्त कार्यालय पहुंचे। झारखंड मूलवासी अधिकार मंच और टाटा विस्थापित संगठन के बैनर तले पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त से मुलाकात कर स्पष्ट शब्दों में कहा कि लीज नवीनीकरण की प्रक्रिया ने रैयतों और मूल निवासियों के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों को कुचल दिया है।

रैयतों और मूल निवासियों ने उपायुक्त को बताया कि वर्ष 2005 में हुए टाटा लीज नवीनीकरण के समय ग्रामसभा की सहमति नहीं ली गई और पेसा कानून, सीएनटी और एसपीटी अधिनियम के प्रावधानों की खुलेआम अनदेखी की गई। उन्होंने कहा कि उनकी पुश्तैनी और रैयती जमीन पर बिना विधिवत अधिग्रहण और बिना मुआवजा दिए कब्जा कर लिया गया, जबकि वास्तविक विस्थापित आज भी न्याय के लिए भटक रहे हैं।

प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त से कहा कि कई ऐसे लोगों को विस्थापित घोषित कर लाभ दिया गया, जिनका जमीन से कोई लेना-देना नहीं है, जबकि असली रैयत और मूल निवासी अपने ही क्षेत्र में बेदखल होकर हाशिये पर धकेल दिए गए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि न्यायालय में मामले लंबित होने के बावजूद जमीन को लीज और सब-लीज पर देकर कॉर्पोरेट हितों को प्राथमिकता दी गई।

रैयतों और मूल निवासियों ने उपायुक्त से साफ कहा कि यदि उनकी जमीन की विधिवत जांच कर वास्तविक हकदारों को उनका अधिकार नहीं लौटाया गया तो यह अन्याय और गहराएगा। उन्होंने मांग की कि टाटा लीज नवीनीकरण से जुड़े हर निर्णय में रैयतों और मूल निवासियों को सीधे तौर पर शामिल किया जाए और बिना ग्रामसभा की लिखित सहमति के कोई भी फैसला न लिया जाए।

उन्होंने उपायुक्त को यह भी बताया कि शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में स्थित पुराने तालाब, जलस्रोत और सामुदायिक संसाधन कभी ग्रामसभा के अधीन थे, लेकिन अब उन पर निजी और कॉर्पोरेट कब्जा हो चुका है। रैयतों और मूल निवासियों ने मांग की कि इन संसाधनों को ग्रामसभा को लौटाया जाए ताकि समुदाय का अधिकार सुरक्षित रह सके।

उपायुक्त ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुनते हुए आश्वासन दिया कि स्थायी समाधान के लिए सभी रैयती और विस्थापित परिवार अपने-अपने दस्तावेज, खतियान, रसीद और अन्य अभिलेख उपायुक्त कार्यालय में जमा कराएं। इनकी जांच के बाद नियमों के अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।

रैयतों और मूल निवासियों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन की ओर से शीघ्र पारदर्शी और ठोस कदम नहीं उठाए गए तो वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन को और व्यापक रूप देंगे। प्रतिनिधिमंडल में हरमोहन महतो, दीपक रंजीत, कृष्णा लोहार, राइमूल, भारती रजक, निमाई गोप, राजन सिंह, मधुसूदन माझी, कांसी प्रधान, सूरज गौड़, गौर हेम्ब्रम, उत्पल महतो, अभिमन्यू गोप सहित अन्य लोग शामिल थे।

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