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बजट में कॉरपोरेट को घी शक्कर, आम जनता को जुमला : असगर खान

*बजट में कॉरपोरेट को घी शक्कर, आम जनता को जुमला : असगर खान*

चंदवा संवाददाता मुकेश कुमार सिंह की रिपोर्ट

*चंदवा (लातेहार) कॉग्रेस के प्रखंड अध्यक्ष सह राज्यसभा सांसद प्रतिनिधि असगर खान ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर केंद्रीय बजट पर कहा है कि महंगाई और बेरोजगारी से जुझ रही जनता को बजट में कोई राहत नहीं मिली है, बजट को लफ्फाजी भरा कॉर्पोरेट बजट करार दिया है, कोरोना संकट और मंदी की दुहरी मार और महंगाई व बेरोजगारी से जूझ रही आम जनता के लिए बजट में राहत की कोई बात नहीं है, यह बजट संपत्ति के संकेंद्रण को बढ़ाएगा और इससे आर्थिक असमानता और तेजी से बढ़ेगी*,

*बजट मे डिजिटल कैरैंसी के* *उपयोग पर ज्यादा जोर है, लेकिन मांग, निवेश और रोजगार के संकट से जुड़े प्रश्न गायब हैं. रेलवे मे पीपीपी माडल का मतलब रेलवे के निजीकरण की रफ्तार बढेगी. नए रोजगार के सृजन पर स्पष्ट फोकस नहीं है केवल 60 लाख नए रोजगार की घोषणा ऊंट के मुंह मे जीरा की कहावत* *को चरितार्थ करता है*,

*जब अर्थव्यवस्था मांग के अभाव और मंदी से जूझ रही हो, तब जरूरत बड़े पैमाने पर नौकरियों के सृजन, मुफ्त खाद्यान्न वितरण और नगद राशि से मदद करने की होती है, ताकि आम जनता* *बाजार से सामान खरीद सके, मांग बढ़े और अर्थव्यवस्था को गति मिले, लेकिन ऐसे किसी उपाय पर अमल करने के बजाय बजट में कॉर्पोरेट टैक्स को घटाने को प्राथमिकता दी गई है, वहीं महंगाई से परेशान मध्यवर्गीय जनता को आयकर में कोई छूट देने से इंकार कर दिया गया है, उंन्होने कहा कि वित्त मंत्री का बजट भाषण लफ्फाजी और जुमलों से भरपूर था*,

*कुलमिलाकर बजट को कॉरपोरेट को घी शक्कर आम जनता को जुमला बजट बताया है*।

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