चंदवा संवाददाता मुकेश कुमार सिंह की रिपोर्ट
चंदवा। टोरी में मैक्लुसकीगंज – निंद्रा स्टेशन के बीच हुई टावर वैगन और पुश ट्रॉली की टक्कर से मृत रेल कर्मचारियों की दुखद, दर्दनाक एवं ह्रदय विदारक मृत्यु की घटना पर शोक प्रकट करते हुए नेताओं ने दोषी रेल अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से की है,
झामुमो के केंद्रीय समिति सदस्य सह पूर्व जिला प्रवक्ता दीपू कुमार सिन्हा, कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष सह राज्यसभा सांसद प्रतिनिधि असगर खान, सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश कुमार उरांव, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता सह चतरा लोकसभा छेत्र से प्रत्याशी रहे अयुब खान ने जारी किए गए अपने वक्तव्य में कहा है कि टोरी जंक्शन में रेलवे के बड़े बड़े अधिकारी बैठते हैं जिनमें यातायात निरीक्षक, आइओ डब्ल्यू, पीडब्ल्यू आई, स्टेशन अधीक्षक व आदि बैठते हैं जिनपर टोरी रेलखंड एरिया के सुरक्षा एवं रेलवे यातायात को सुरक्षित परिचालन की जिम्मेदारी होती है, इतने अधिकारियों का पदस्थापन टोरी में इस लिए किया गया है कि अपने रेलवे कर्मीयों की सुरक्षा के साथ साथ आम जनता की जान माल की रक्षा करते हुए रेल का परिचालन सुरक्षित ठंग से हो सके, ऐसे में यक्ष प्रश्न उठता है कि इनकी मौजूदगी में ही इनके नांक के निचे टोरी रेलवे स्टेशन के पास ही इतनी बड़ी दुर्घटना कैसे घटी, इस घटना से यह प्रश्न भी उठता है कि जब ये अधिकारी अपने ही रेल कर्मियों की सुरक्षा नहीं कर सकते तो यह पूरे रेल खंड में आम लोगों को सुरक्षा कैसे कर पाएंगे, 
ये इतने बेहोश रहते हैं कि इन्हें यह भी याद नहीं रहता कि किस रेलवे लाइन पर किस रेलवे लाइन पर इन्होंने अपने कर्मचारियों की ड्यूटी लगा रखी है, इनकी लापरवाही का ही नतीजा है कि एक ही रेलवे लाइन पर टावर वैगन और पुश ट्रॉली दौड़ा दिया जाता है जिससे इतना बड़ा दर्दनाक हादसा हो जाता है,
इस घटना से साफ जाहिर होता है कि ये अधिकारी रेलवे के रूटीन वर्क को कम तरजीह देकर अवैध कामों के संचालन में ज्यादा ध्यान देते हैं, यह सर्व विदित है कि यहां के रेल अधिकारी कोयला लदी मालगाड़ीयों के डिटेंशन को मैनेज रेलवे के करोड़ों रुपए के राजस्व की छति कर अपना राजस्व बढ़ाने में लगे रहते हैं और इस अवैध उगाही राशि की निचे से उपर तक बंदरबांट करते हैं इसका जिवंत उदाहरण है कि जो अधिकारी यहां आते हैं वे रिटायर होने के बाद ही यहां से जाते हैं, पिछले यातायात निरीक्षक लगभग दसकों तक यहीं पदस्थापित रहने के बाद टोरी से ही सेवानिवृत्त हुए जबकि स्टेशन अधीक्षक दशकों से यहीं पर पदस्थापित हैं, इस रेलखंड में सारे नियम कानून ताक पर रखकर एक ही अधिकारी को पदस्थापित रहने की खुली छुट है, रेलवे की सुरक्षा करने वाली आरपीएफ एवं जीआरपी के अधिकारियों का यह आलम है कि वे खूले आम किसी को भी पकड़कर बुरी तरह पिटाई कर जेल भेज देते हैं, अभी पिछले दिनों ही आरपीएफ टोरी के द्वारा तीन निर्दोष मुस्लिम टेम्पु चालकों को पिट कर अधमरा कर दिया गया था और उनसे खुले आम राशि ऐंठे गए थे, इस घटना की शिकायत जीआरपी एसपी तक की गई थी लेकिन अबतक कार्रवाई नहीं हुई, उक्त घटनाएं टोरी रेल अधिकारियों के चाल चरित्र को दर्शाती हैं और यह भी बतलाती है कि ये अधिकारी अपने ड्यूटी को किस अंदाज मे निभाते हैं, नेताओं ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से रेलवे मंत्री समेत रेलवे के उच्चाधिकारियों से घटना का निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर दंडित करने की मांग किया है साथ ही मृतकों के परिजनों को नौकरी और प्रयाप्त मुआवजा देने की मांग की है, कार्रवाई नहीं होने मामले की लीपापोती होने की स्थिति में आंदोलनात्मक कदम उठाने की बात कही है।

