*चुनावी हाल चाल*
*पंचायत चुनाव टलने के तुरंत बाद चुनावी मैदान में उतरे उम्मीदवार को समाजसेवा में आई भारी गिरावट*
*समाजसेवा के नाम पर ढोंग करने वाले उम्मीदवार की होने लगी पहचान*
पंचायत चुनाव की जब सूचना मिलने के बाद दिसंबर के महीने में पंचायत चुनाव करा लिए जाएंगे तो पता नहीं बरसाती मेंढक की तरह से कितने समाजसेवियों का उत्थान अचानक से हो गया था।किसी को मालूम नहीं सभी समाजसेवी धूम मचाने लगे कि में समाजसेवा में कोई कहता है की मैं समाजसेवा में अब्बल हूं। सभी लोग एक दूसरे का बीपीएल,राशन कार्ड बनाना, वृद्धा पेंशन दिलवाना, विधवा पेंशन दिलवाने के संबंधित चर्चाएं फैलाने लगे थे। ऐसा लग रहा था मानो कि पूरे टंडवा प्रखंड में समाजसेवियों की होड़ लग गई हो।सभी समाजसेवियों ने दीपावली,छठ पूजा की बधाई देना प्रारंभ कर दिए थे।जिसकी पहचान मतदाता करना प्रारंभ कर दिए है। हालांकि आज भी जो सच्चे समाजसेवी हैं जिन्हें चुनावी माहौल से कोई मतलब नहीं होता वह आज भी क्षेत्र में डटे हुए है और अपनी सेवा दे रहे हैं।ऐसे लोगों की पहचान जनता बखूबी कर रहे हैं। परंतु यही वह अवसर है जब एक बार पुनः पंचायत चुनाव होने की घोषणा किया जाएगा तो फिर से एक बार समाजसेवी मेंढक की तरह उछलते हुए चुनावी माहौल में आ जाएंगे! जिससे मतदाता उनकी अच्छी तरीके से पहचान करेंगे कि कौन समाजसेवी है और कौन समाजसेवी नहीं है और कौन हित की रक्षा कर सकता है और कौन नहीं कर सकता हैं।केवल अपना स्वार्थ साधने के लिए पंचायत चुनाव में खड़ा होना चाहता है, परंतु अब मतदाताओं को मूर्ख बनाकर उनके मतों का दुरुपयोग करना इतना आसान नहीं रह गया है जितना यह समाजसेवी सोचते हैं! प्रखंड के हर जगह चौक चौराहों पर चुनावी चर्चा परिचर्चा लगभग लगभग समाप्त होने लगे हैं। एक समय ऐसा था जब चुनाव परिसर के बहुत अधिक मात्रा में होने लगे थे क्योंकि नवंबर में अधिसूचना जारी होने वाला था परंतु जैसे ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सरकार आपके द्वार कार्यक्रम प्रारंभ किया और पंचायत चुनाव को टाल दिया गया।वैसे चुनावी चर्चा परिचर्चा भी समाप्त हो गए चौक चौराहों के छोटे-छोटे दुकानों पर फ्री में चाय पिलाने वाले समाजसेवी भी अचानक से लापता हो आये जिसके कारण से मुक्त में चाय पीने वाले लोगों को भी भारी नुकसान हो रहा है।

