झारखंड विधानसभा में बजट सत्र के अंतिम दिन 23 मार्च 2021 को बड़े ही नाटकीय ढंग से “क्षेत्रीय विकास प्राधिकार संशोधन विधेयक 2021” बिना चर्चा किए ही विधानसभा में पास कर दिया गया जो अत्यंत हास्यास्पद और झारखंड के भुमि अधिनियम सीएनटी और एसपीटी के विरुद्ध है। अब इस बिल पर महामहिम राज्यपाल द्वारा हस्ताक्षर होने के बाद कानून बन जाएगा। इसमें यह भी प्रावधान किया गया है कि नगर निकायों की सीमा से 10 किलोमीटर की परिधि तक किसी का भी जमीन लिया जा सकता है। यानी झारखंड में जितने भी शहर हैं उसके इर्द-गिर्द 10 किलोमीटर तक के क्षेत्र में रहने वाले आदिवासियों की भी जमीन खरीद की जा सकती है । शहरीकरण को विस्तार देने के लिए जमीन मालिकों से एग्रीमेंट कर लैंड पूल बनाने की बात कही गई है। सरकारी एजेंसियां हो या निजी कंपनियां जमीन मालिकों के साथ सीधे बातचीत कर जमीन ले सकती है। मेरी नजर से अब यह काला कानून लागू हो जाने के बाद उस क्षेत्र में ‘छोटानागपुर टेनेंसी एक्ट ‘और ‘संथाल परगना टेनेंसी एक्ट ‘ आड़े नहीं आएगा , बल्कि प्रभावहीन हो जाएगा। अपनी मनमर्जी से प्राइवेट कंपनियां झारखंड के जमीन बड़ी आसानी से खरीद बिक्री कर सकती हैं।
सीएनटी एक्ट और एसपीटी एक्ट की रक्षा करने का दावा करने वाली झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व वाली सरकार और उसमें भी आदिवासी मुख्यमंत्री जल जंगल जमीन की सुरक्षा का वादा के साथ चुनाव में समर्थन मांगा और खुद आदिवासी होते हुए आदिवासी एवं तमाम झारखंडियों का अस्तित्व खतरे में डालने का काम किया है।
@संजीव कुमार महतो, केंद्रीय सचिव आजसू

