Breaking
Thu. Nov 5th, 2026

*बिना प्रमाण वोट चोरी का आरोप लगाना लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा करना है : बड़कुंवर गागराई*

चाईबासा: पूर्व मंत्री एवं भाजपा नेता बड़कुंवर गागराई ने झारखंड के मंत्री दीपक बिरुवा के मतदाता सूची से लाखों लोगों के नाम काटे जाने और वोट चोरी होने संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि बिना ठोस प्रमाण के इस तरह के गंभीर आरोप लगाना उचित नहीं है। दीपक बिरुवा को यह समझना चाहिए कि वे एक संवैधानिक पद पर हैं और उन्हें निर्वाचन आयोग की कानूनी एवं संवैधानिक प्रक्रियाओं की जानकारी होनी चाहिए।

बड़कुंवर गागराई ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कोई नई प्रक्रिया नहीं है। आजादी के बाद से निर्वाचन आयोग समय-समय पर मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण करता रहा है। आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 1952-56, 1957, 1961, 1965, 1966, 1983-84, 1987-89, 1992, 1993, 1995, 2002, 2003 और 2004 में भी यह प्रक्रिया अपनाई गई थी। इसके अलावा नियमित रूप से मतदाता सूची का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण भी किया जाता रहा है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान देशव्यापी एसआईआर के आंकड़ों के अनुसार लगभग 13.39 करोड़ नाम प्रारूप मतदाता सूची से हटाए गए हैं। इनमें करीब 6.30 करोड़ स्थायी रूप से स्थानांतरित, 3.01 करोड़ अनुपस्थित या सत्यापन में नहीं मिले, 2.80 करोड़ मृत और 1.02 करोड़ दोहरी प्रविष्टि वाले मतदाता शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों को अपने आप में वोट चोरी का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

गागराई ने कहा कि किसी भी योग्य मतदाता का नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से नहीं हटना चाहिए। यदि कहीं गड़बड़ी हुई है तो संबंधित साक्ष्य निर्वाचन आयोग के समक्ष प्रस्तुत किए जाने चाहिए। केवल विरोध के नाम पर भ्रम फैलाना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी है कि संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करें। बिना प्रमाण आरोप लगाने और राजनीतिक टकराव बढ़ाने से लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होती है। इसका नुकसान अंततः आम जनता को ही उठाना पड़ता है।

Related Post