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Fri. Oct 30th, 2026

सड़क दुर्घटना में घायल की मदद के लिए आगे आएं लोग, शुरुआती मिनटों में सहायता से बच सकती है जान : संतोष कुमार

जमशेदपुर। सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को समय पर प्राथमिक उपचार और चिकित्सा सहायता मिल जाए तो उसकी जान बचाई जा सकती है। दुर्घटना के बाद शुरुआती एक घंटा यानी गोल्डन ऑवर बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान घटनास्थल पर मौजूद लोगों की तत्परता और नेक मददगार (गुड समैरिटन) की भूमिका काफी अहम होती है। लोगों को कानूनी कार्रवाई के डर या अन्य आशंकाओं के कारण घायलों की मदद करने से पीछे नहीं हटना चाहिए। ये बातें सिविल डिफेंस इंस्पेक्टर एवं राष्ट्रपति सम्मानित सदस्य संतोष कुमार ने शुक्रवार को एमडीडीटीआई में आयोजित सड़क सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कहीं।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में रेलवे के विभिन्न विभागों के 70 रेलकर्मियों को सड़क दुर्घटनाओं के कारण, घटनास्थल पर बचाव कार्य, प्राथमिक उपचार, सीपीआर, एम्बुलेंस सेवा, आपदा प्रबंधन और नेक मददगारों के अधिकारों की जानकारी दी गई। संतोष कुमार ने कहा कि तेज रफ्तार, वाहन चलाते समय मोबाइल का इस्तेमाल, नशे में गाड़ी चलाना, नींद और थकान की स्थिति में वाहन चलाना तथा हेलमेट और सीट बेल्ट की अनदेखी सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण हैं।

उन्होंने बताया कि दुर्घटना के बाद सबसे पहले घटनास्थल को सुरक्षित करना, आपातकालीन सहायता बुलाना और घायल की स्थिति का आकलन करना जरूरी है। अधिक रक्तस्राव होने पर उसे नियंत्रित करने का प्रयास करना चाहिए। प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा सीपीआर देना भी जीवन बचाने में मददगार हो सकता है। हालांकि, सिर या रीढ़ की हड्डी में चोट की आशंका होने पर घायल को बिना जरूरत हिलाना-डुलाना नहीं चाहिए।

संतोष कुमार ने नेक मददगारों को मिलने वाले कानूनी संरक्षण की जानकारी देते हुए बताया कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 134ए के तहत दुर्घटना पीड़ितों की स्वेच्छा से मदद करने वालों के अधिकार सुरक्षित किए गए हैं। मदद करने वाले व्यक्ति को अनावश्यक कानूनी प्रक्रिया में उलझाने से बचाने के प्रावधान हैं। घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति पर इलाज का खर्च उठाने या अस्पताल की औपचारिकताएं पूरी करने की जिम्मेदारी भी नहीं होती।

उन्होंने केंद्र सरकार की राहवीर योजना और सड़क दुर्घटना पीड़ितों के कैशलेस उपचार की व्यवस्था के बारे में भी बताया। योजना के तहत पात्र नेक मददगारों को प्रोत्साहन राशि और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाता है। उन्होंने कहा कि दुर्घटना के बाद घायलों को शीघ्र अस्पताल पहुंचाना और उनकी स्थिति के अनुसार उपचार की प्राथमिकता तय करना बेहद जरूरी है।

प्रशिक्षण के दौरान डेमोंस्ट्रेटर अनिल कुमार सिंह ने सीपीआर, प्राथमिक चिकित्सा, पट्टी बांधने, फ्रैक्चर की स्थिति में प्रभावित अंग को स्थिर रखने और अग्निशामक यंत्र के इस्तेमाल का व्यावहारिक प्रदर्शन किया। मॉक ड्रिल के जरिए रेलकर्मियों को आपातकालीन परिस्थितियों में सुरक्षित तरीके से बचाव कार्य करने का अभ्यास भी कराया गया।

कार्यक्रम में कैरेज एंड वैगन, इंजीनियरिंग, ऑपरेटिंग, कमर्शियल और लोको शेड विभाग के 70 रेलकर्मियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान एमडीडीटीआई के प्रिंसिपल ने रेल सिविल डिफेंस टीम के प्रशिक्षण और जागरूकता प्रयासों की सराहना करते हुए टीम को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।

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