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*मौन धरना की अनुमति नहीं मिलने पर रमेश बालमुचू ने उठाए सवाल*

चाईबासा: नो एंट्री आंदोलन के दौरान हुए लाठीचार्ज, आंदोलनकारियों की गिरफ्तारी और दर्ज मुकदमों के विरोध में 27 अक्टूबर को अनुमंडल पदाधिकारी कार्यालय के समक्ष प्रस्तावित मौन धरना-प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने पर नो एंट्री आंदोलन समिति, कोल्हान के संयोजक रमेश बालमुचू ने नाराजगी जताई है। उन्होंने प्रशासन के फैसले को लोकतांत्रिक अधिकारों पर प्रहार बताते हुए इसकी निंदा की है।

रमेश बालमुचू ने 26 अक्टूबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि 27 अक्टूबर 2025 को तांबो चौक पर नो एंट्री आंदोलन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। इसके बाद आंदोलनकारियों को गिरफ्तार किया गया और 74 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई। साथ ही 500 से अधिक अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया। इन घटनाओं की पहली वर्षगांठ पर समिति ने शांतिपूर्ण मौन धरना देने के लिए अनुमंडल पदाधिकारी कार्यालय में आवेदन देकर अनुमति मांगी थी। समिति का दावा है कि पहले मौखिक सहमति दी गई थी, लेकिन कार्यक्रम से दो दिन पहले अनुमति नहीं देने का आदेश जारी कर दिया गया।

समिति की प्रमुख मांगों में एनएच-75 ई, एनएच-220 और एमडीआर-177 सड़कों पर भारी वाहनों के परिचालन के लिए समय आधारित नो एंट्री लागू करना तथा आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को वापस लेना शामिल है।

बालमुचू ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखना नागरिकों का लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि प्रशासन को कानून-व्यवस्था की चिंता थी, तो अनुमति नहीं देने के स्पष्ट कारण सार्वजनिक किए जाने चाहिए थे।

उन्होंने प्रशासन से अनुमति रद्द करने के कारण बताने, आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों की निष्पक्ष समीक्षा करने और लाठीचार्ज की जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़े सवालों का समाधान प्रतिबंध लगाने के बजाय संवाद और न्यायपूर्ण कार्रवाई से किया जाना चाहिए। समिति ने भविष्य में भी शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अपनी मांगें उठाते रहने की बात कही।

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