चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले के सदर चाईबासा प्रखंड अंतर्गत हारिला पंचायत के गितिलपी गांव में डीएमएफटी मद से बनने वाली जलमीनार निर्धारित समय सीमा बीतने के बावजूद अब तक अधूरी है। इस मामले को लेकर भारत आदिवासी पार्टी के पश्चिमी सिंहभूम जिलाध्यक्ष सुशील बारला ने योजना की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
सुशील बारला के अनुसार, गितिलपी गांव में घर-घर नल से जल पहुंचाने के उद्देश्य से ईएसआर संख्या-3 के तहत 3.60 लाख लीटर क्षमता और 18 मीटर स्टेजिंग वाली जलमीनार का निर्माण कराया जा रहा है। इस योजना के लिए 12 फरवरी 2019 को एकरारनामा किया गया था। निर्माण कार्य पूरा करने की निर्धारित तिथि 11 फरवरी 2022 थी। योजना का काम चेन्नई की कंपनी एम/एस श्रीराम ईपीसी लिमिटेड (M/S Shriram EPC Limited) को दिया गया है।
उन्होंने कहा कि निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बावजूद जलमीनार का अधूरा रहना चिंता का विषय है। डीएमएफटी मद से राशि खर्च किए जाने के बाद भी ग्रामीणों को योजना का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। इससे निर्माण कार्य की प्रगति और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठते हैं।
सुशील बारला ने मांग की कि योजना की स्वीकृत राशि, अब तक किए गए भुगतान, निर्माण की वर्तमान स्थिति और कार्य में देरी के कारणों की जांच कराई जाए। यदि जांच में लापरवाही या अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित संवेदक और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
उन्होंने झारखंड सरकार और जिला प्रशासन से जलमीनार का निर्माण गुणवत्तापूर्ण तरीके से जल्द पूरा कराने की मांग की, ताकि ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो सके। साथ ही उन्होंने डीएमएफटी मद से संचालित विकास योजनाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने पर जोर दिया, जिससे खनन प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को योजनाओं का वास्तविक लाभ मिल सके।

