जमशेदपुर। विज्ञान और अनुसंधान की दुनिया में धातुओं के गुणों और नई तकनीकों पर काम करने वाले वैज्ञानिकों ने सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल) के एग्रिको आवासीय परिसर में दुर्गोत्सव के दौरान आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। श्री श्री दुर्गा पूजा समिति की ओर से आयोजित पांच दिवसीय दुर्गोत्सव में मां दुर्गा की आराधना के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों, विभिन्न प्रतियोगिताओं और पारिवारिक गतिविधियों ने पूरे परिसर को भक्तिमय और उत्सवपूर्ण वातावरण से भर दिया। वैज्ञानिकों, उनके परिवारों और बच्चों ने मिलकर इस महोत्सव को केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक जुड़ाव का उत्सव बना दिया।
एनएमएल परिसर में दुर्गापूजा के दौरान वैज्ञानिकों और कर्मचारियों के परिवारों ने पारंपरिक श्रद्धा के साथ मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की। प्रतिदिन के धार्मिक अनुष्ठानों के बीच सांस्कृतिक गतिविधियों ने उत्सव की रौनक बढ़ाई। बच्चों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं और कार्यक्रमों में भाग लेकर अपनी प्रतिभा और रचनात्मकता का प्रदर्शन किया। परिवारों की सामूहिक सहभागिता ने परिसर के माहौल को आत्मीयता और उल्लास से भर दिया। व्यस्त वैज्ञानिक जीवन और अनुसंधान संबंधी जिम्मेदारियों के बीच इस आयोजन ने लोगों को एक साथ बैठने, परंपराओं से जुड़ने और खुशियां साझा करने का अवसर दिया।
इस दुर्गोत्सव की खासियत यह रही कि यहां विज्ञान और भारतीय संस्कृति के बीच एक सुंदर सामंजस्य दिखाई दिया। प्रयोगशालाओं में ज्ञान, तर्क और अनुसंधान के माध्यम से समाज के विकास में योगदान देने वाले वैज्ञानिकों ने धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी प्रदर्शित की। पूजा के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और सामूहिक जीवन की परंपराओं से परिचित कराने का प्रयास किया गया। मां दुर्गा की आराधना के साथ शक्ति, साहस, अन्याय के विरुद्ध संघर्ष और सत्य की विजय का संदेश भी लोगों तक पहुंचा।
पांच दिनों तक चले इस महोत्सव ने आवासीय परिसर के लोगों के बीच आपसी सहयोग और सामाजिक सौहार्द को मजबूत किया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की सहभागिता ने इसे पारिवारिक उत्सव का स्वरूप दिया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों और प्रतियोगिताओं के माध्यम से प्रतिभागियों को अपनी कला और क्षमता दिखाने का अवसर मिला। आयोजन से जुड़ी सामूहिक जिम्मेदारी ने समिति के सदस्यों और निवासियों के बीच सहयोग की भावना को भी सुदृढ़ किया।
अगले वर्ष स्वर्ण जयंती मनाने की तैयारी
इस बार के दुर्गोत्सव का विशेष महत्व इसलिए भी रहा कि आगामी वर्ष श्री श्री दुर्गा पूजा/काली पूजा समिति अपनी स्थापना के 50 वर्ष पूरे करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। स्वर्ण जयंती का अवसर समिति के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि होगा। इसके माध्यम से पांच दशकों की धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक यात्रा को याद करने के साथ उन लोगों के योगदान को सम्मान देने का अवसर मिलेगा, जिन्होंने वर्षों से इस परंपरा को जीवंत बनाए रखा है। स्वर्ण जयंती समारोह को यादगार बनाने के लिए परिसर के निवासियों में अभी से उत्साह देखा जा रहा है।
पूजा समारोह को सफल बनाने में डॉ. संदीप घोष चौधरी, ओ. निवास राव, विल्व विशाल, डॉ. कृष्ण कुमार, राजीव श्रीवास्तव, सुब्रमण्यम, डॉ. अंजनी साहू, सरोज कुमार, अभिषेक कुमार, देव प्रकाश सिंह, पी.पी. पॉल, नवीन शर्मा, डॉ. बीना कुमारी, डॉ. पुरुषोत्तम कुमार और डी.पी. साहू सहित अन्य सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सामूहिक प्रयासों से संपन्न यह दुर्गोत्सव श्रद्धा, संस्कृति और सामाजिक एकता की यादगार मिसाल बना और आगामी स्वर्ण जयंती समारोह के लिए नई उम्मीदें जगा गया।

