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Wed. Oct 14th, 2026

टाटा पावर के पास डेटा सेंटर क्षेत्र में 2.8 गीगावाट से अधिक की परियोजनाओं का अवसर, एआई और डिजिटल विकास को मिलेगी मजबूती

18 प्रमुख वैश्विक और घरेलू डेटा सेंटर कंपनियों के साथ 29 परियोजनाओं पर चल रहा काम, नवीकरणीय ऊर्जा से लेकर ट्रांसमिशन और बिजली वितरण तक समाधान उपलब्ध कराएगी कंपनी

जमशेदपुर। भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल सेवाओं की तेजी से बढ़ती मांग के बीच टाटा पावर डेटा सेंटर उद्योग के लिए एक प्रमुख ऊर्जा भागीदार के रूप में उभर रही है। कंपनी के पास डेटा सेंटर क्षेत्र में 2.8 गीगावाट से अधिक क्षमता के अवसरों का व्यापक पोर्टफोलियो है। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा, बिजली पारेषण और वितरण से जुड़ी संभावनाएं शामिल हैं। कंपनी देश के तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल बुनियादी ढांचे की बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए एकीकृत ऊर्जा समाधान उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है।
बुधवार को टाटा पावर दी गई जानकारी के अनुसार, कंपनी 18 प्रमुख वैश्विक और घरेलू डेटा सेंटर संचालकों के साथ कुल 29 सक्रिय परियोजना कार्यों पर जुड़ी हुई है। इसके अवसरों के पोर्टफोलियो में कंपनी के बिजली वितरण नेटवर्क के अंतर्गत विकसित होने वाले डेटा सेंटरों के लिए लगभग 430 मेगावाट की संभावित बिजली मांग, पारेषण नेटवर्क से संबंधित 1,236 मेगावाट के अवसर और हरित ऊर्जा की 1,150 मेगावाट क्षमता से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं। इन अवसरों के माध्यम से कंपनी बड़े डेटा सेंटरों और एआई आधारित डिजिटल सुविधाओं के विकास में अपनी भूमिका मजबूत कर रही है।

डेटा सेंटरों की जरूरतें केवल बिजली आपूर्ति तक सीमित नहीं हैं। इन केंद्रों को निर्बाध बिजली, मजबूत ग्रिड कनेक्टिविटी, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, शीतलन प्रणाली और अन्य उपयोगिता सुविधाओं की आवश्यकता होती है। टाटा पावर बिजली उत्पादन से लेकर पारेषण और वितरण तक पूरी ऊर्जा शृंखला में अपनी मौजूदगी के आधार पर इन जरूरतों के लिए एकीकृत समाधान उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है। कंपनी की सेवाओं में बिजली की उपलब्धता के अनुरूप भूमि, ग्रिड से कनेक्टिविटी, ऊर्जा भंडारण और अन्य जरूरी बुनियादी सुविधाएं भी शामिल हैं।

मुंबई महानगर क्षेत्र में बड़े डेटा सेंटरों की बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए कंपनी अपने पारेषण नेटवर्क को भी मजबूत कर रही है। इसके तहत 110 केवी और 220 केवी नेटवर्क का उन्नयन, बिजली रूपांतरण और पारेषण क्षमता का विस्तार तथा वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही नए रिसीविंग स्टेशन विकसित करने और 400 केवी का पारेषण रिंग नेटवर्क तैयार करने की योजना पर भी काम हो रहा है। इसका उद्देश्य बड़े डिजिटल केंद्रों को विश्वसनीय और निर्बाध बिजली उपलब्ध कराना है। यह काम मुंबई ग्रिड के उन्नयन और विस्तार के लिए बनाई गई 15,000 करोड़ रुपये की योजना का हिस्सा है।

भारत को वैश्विक एआई और डिजिटल बुनियादी ढांचे के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने में बिजली की उपलब्धता अहम भूमिका निभाएगी। बिजली मंत्रालय के अनुसार, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के अनुमानों के आधार पर एआई आधारित डेटा सेंटरों के कारण वित्त वर्ष 2031-32 तक देश की बिजली मांग में लगभग 26.3 गीगावाट की अतिरिक्त वृद्धि हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने भी डेटा सेंटरों और बिजली की बढ़ती मांग में भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया है।

ऐसे में टाटा पावर का 2.8 गीगावाट से अधिक क्षमता के अवसरों वाला पोर्टफोलियो कंपनी के लिए डिजिटल बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में विस्तार की महत्वपूर्ण संभावना प्रस्तुत करता है। नवीकरणीय ऊर्जा, मजबूत पारेषण नेटवर्क और एकीकृत बिजली समाधानों के जरिए कंपनी भारत में अगली पीढ़ी के डेटा सेंटरों और एआई आधारित सेवाओं की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में योगदान देने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

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