Breaking
Mon. Sep 21st, 2026

एमएमडीआर एक्ट पर केंद्र को घेरा, कुणाल षाड़ंगी बोले- खनिज संपदा पर राज्य के अधिकार से समझौता नहीं

जमशेदपुर। खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम 2026 को लेकर झारखंड में सियासी घमासान के बीच झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता सह पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी ने सोमवार को जमशेदपुर परिसदन में प्रेस कांफ्रेंस कर केंद्र सरकार और भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 19 सितंबर को राज्य के सभी प्रखंड मुख्यालयों में झामुमो के आह्वान पर हुआ धरना-प्रदर्शन इस मुद्दे को लेकर जनता की प्रतिक्रिया का संकेत है। झामुमो के अनुसार राज्यभर के 260 प्रखंडों में प्रदर्शन किए गए और ज्ञापन सौंपे गए।

कुणाल षाड़ंगी ने कहा कि एमएमडीआर संशोधन को लेकर झामुमो का विरोध केवल राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि झारखंड के खनिज संसाधनों, राज्य के राजस्व अधिकार और जल-जंगल-जमीन से जुड़े सवालों का विषय है। उन्होंने कहा कि इस कानून से राज्य की वित्तीय स्थिति और सामाजिक कल्याण की योजनाओं पर संभावित प्रभाव को लेकर सरकार और जनता के बीच चर्चा होनी चाहिए। झामुमो का दावा है कि इससे राज्य को प्रतिवर्ष करीब 14 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है। यह आंकड़ा पहले राज्य के वित्त मंत्री और कांग्रेस की ओर से भी सार्वजनिक रूप से उठाया गया है।

उन्होंने कहा कि झारखंड जैसे खनिज संपदा से समृद्ध राज्य में कोयला और अन्य खनिजों के उपयोग से जुड़े उद्योगों को स्थानीय परिस्थितियों, परिवहन, विस्थापन और प्रदूषण जैसे मुद्दों को भी ध्यान में रखना चाहिए। उनके मुताबिक कंपनियों को उद्योग चलाने के लिए जिस ग्रेड के कोयले या खनिज की आवश्यकता होती है, उसके परिवहन और उपयोग की पूरी व्यवस्था पर राज्य के हितों के साथ विचार किया जाना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने इतना बड़ा निर्णय लेने से पहले राज्य सरकार से पर्याप्त चर्चा नहीं की।

कुणाल षाड़ंगी ने कहा कि यदि केंद्र सरकार संघीय ढांचे और राज्यों के अधिकारों का सम्मान करने की बात करती है, तो उसे राज्य के हितों से जुड़े मुद्दों पर राज्यों के साथ संवाद भी करना चाहिए। उन्होंने भाजपा नेताओं से भी झारखंड के खनिज संसाधनों और उससे मिलने वाले राजस्व के सवाल पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

एमएमडीआर संशोधन को लेकर केंद्र और झामुमो की दलीलों में अंतर भी सामने आया है। झामुमो जहां राज्य के राजस्व और अधिकारों पर असर पड़ने की आशंका जता रहा है, वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि राज्यों को खनन से मिलने वाला लगभग 90 प्रतिशत राजस्व विभिन्न माध्यमों से मिलता रहेगा और संशोधन से राज्यों के भूमि एवं खनिज संबंधी अधिकार समाप्त नहीं होते।

कुणाल षाड़ंगी ने कहा कि खनिज संपदा से मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, पेंशन और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं में होता है। इसलिए कानून के दूरगामी आर्थिक प्रभाव पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि झामुमो इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाएगा और राज्य के हितों से जुड़े सवालों पर अपना आंदोलन आगे जारी रखेगा।

Related Post