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बिना ठोस सबूत बीमा दावा खारिज करना पड़ा महंगा, गो डिजिट को 2.74 लाख रुपये चुकाने का आदेश

चाईबासा। दुर्घटनाग्रस्त वाहन का बीमा दावा पर्याप्त साक्ष्य के बिना खारिज करना गो डिजिट जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड को महंगा पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, पश्चिमी सिंहभूम के अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह की पीठ ने शिकायतकर्ता मुकेश कुमार मोदी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को 2,34,698 रुपये की बीमा राशि देने का आदेश दिया है। इसके साथ मानसिक परेशानी और उत्पीड़न के लिए 25 हजार रुपये तथा मुकदमे के खर्च के रूप में 15 हजार रुपये का भुगतान करने को कहा गया है। बीमा राशि पर शिकायत दर्ज करने की तिथि से भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

मामला आमला टोला, चाईबासा निवासी गोपी चंद मोदी के पुत्र मुकेश कुमार मोदी के वाहन संख्या जेएच-05 बीजेड-1808 से जुड़ा है। वाहन का गो डिजिट जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड से 2 फरवरी 2025 से 1 फरवरी 2026 तक बीमा कराया गया था। वाहन की बीमित घोषित कीमत 2,34,698 रुपये थी।

मुकेश कुमार मोदी के अनुसार 9 मार्च 2025 की रात वह चाईबासा से क्योंझर जा रहे थे। रिमुली, क्योंझर के पास दो तेज रफ्तार ट्रक एक-दूसरे को ओवरटेक कर रहे थे। इसी दौरान दोनों ट्रक उनकी कार के दोनों ओर आ गए। टक्कर से बचने के लिए उन्होंने कार को दायीं ओर मोड़ा, लेकिन सड़क किनारे खड़े एक अन्य ट्रक से वाहन टकरा गया। हादसे में कार के अगले और बाएं हिस्से को काफी क्षति पहुंची।

दुर्घटना की सूचना देने के बाद मुकेश ने बीमा कंपनी के समक्ष दावा प्रस्तुत किया, लेकिन कंपनी ने भुगतान करने से इनकार कर दिया। कंपनी का कहना था कि वाहन को हुई क्षति शिकायतकर्ता द्वारा बताए गए दुर्घटना के कारण से मेल नहीं खाती। शिकायतकर्ता ने फोन, संदेश और ई-मेल के माध्यम से कंपनी से कई बार संपर्क किया, लेकिन दावा निपटाया नहीं गया।

मामले की सुनवाई के दौरान आयोग की ओर से नोटिस जारी किए जाने के बावजूद बीमा कंपनी ने न तो अपना लिखित पक्ष रखा और न ही सुनवाई में कोई प्रतिनिधि भेजा। कंपनी ने अपने दावे के समर्थन में सर्वेक्षण रिपोर्ट, जांच रिपोर्ट, तकनीकी रिपोर्ट अथवा कोई अन्य ठोस साक्ष्य भी प्रस्तुत नहीं किया। इसके बाद 18 अप्रैल 2026 को मामला कंपनी के विरुद्ध एकतरफा तय किया गया।

आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि केवल यह कह देना कि वाहन को हुई क्षति बताए गए हादसे के अनुरूप नहीं है, बीमा दावा खारिज करने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता। कंपनी को अपने निर्णय के समर्थन में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करना चाहिए था। साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराने की स्थिति में दावा खारिज करना सेवा में कमी माना जाएगा।

आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया कि निर्धारित राशि का भुगतान 45 दिनों के भीतर किया जाए। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। हालांकि वाहन की पार्किंग और किराये के वाहन पर हुए खर्च की अतिरिक्त मांग को पर्याप्त प्रमाण नहीं होने के कारण आयोग ने स्वीकार नहीं किया। मामले की संस्थापन तिथि 22 दिसंबर 2025, अंतिम सुनवाई 29 अगस्त 2026 और फैसला 10 सितंबर 2026 को सुनाया गया।

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