जमशेदपुर। जमशेदपुर बार एसोसिएशन के वरीय सदस्य सुधीर कुमार पप्पू ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा की कार्यशैली से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत का यह निर्णय केवल बार काउंसिल ऑफ इंडिया तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की तमाम लोकतांत्रिक संस्थाओं, संगठनों, ट्रस्ट और सोसायटियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश देता है।
सुधीर कुमार पप्पू ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक संस्था में पदाधिकारी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी पद पर बने रहना और कार्यकारिणी की अनदेखी कर महत्वपूर्ण निर्णय लेना लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना के अनुरूप नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया में भी कार्यकारिणी की राय को दरकिनार कर निवेश और अन्य नीतिगत फैसले किए जा रहे थे, जिस पर सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से स्थिति स्पष्ट हुई है।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि मनन कुमार मिश्रा स्थायी रूप से निर्वाचित अध्यक्ष नहीं हैं, बल्कि प्रोटेम चेयरमैन के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। नई बार काउंसिल ऑफ इंडिया के गठन तक उनकी भूमिका मुख्य रूप से रोजमर्रा के प्रशासनिक और आवश्यक कार्यों तक सीमित रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि बीसीआई द्वारा कोई बड़ा नीतिगत निर्णय लेने से पहले अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल से परामर्श किया जाए और उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही राज्य बार काउंसिलों के चुनाव और उनके गठन की प्रक्रिया को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
सुधीर कुमार पप्पू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला संस्थाओं में जवाबदेही, सामूहिक निर्णय और लोकतांत्रिक मर्यादा को मजबूत करने वाला है। उनके अनुसार, किसी भी संस्था में व्यक्तिगत अधिकार से ऊपर संविधान, नियम और सामूहिक निर्णय की व्यवस्था होनी चाहिए।
मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा के लिए अगली सुनवाई 17 सितंबर 2026 को निर्धारित की है।

