जमशेदपुर। कोल्हान के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में शुमार एमजीएम अस्पताल, डिमना-मानगो में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन अस्पताल के बाहर की बदहाल व्यवस्था इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किए गए अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार के बाहर गंदगी, कचरे और अव्यवस्थित पार्किंग की स्थिति से मरीजों और उनके परिजनों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
शनिवार को पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा सड़क दुर्घटना में घायल एक मरीज का हाल जानने एमजीएम अस्पताल पहुंचे थे। हालांकि, जिस मरीज को देखने के लिए वह अस्पताल पहुंचे थे, उसकी मौत हो चुकी थी। अस्पताल पहुंचने के दौरान मुख्य गेट के बाहर पार्किंग क्षेत्र की स्थिति देखकर अर्जुन मुंडा नाराज हो गए। उन्होंने अस्पताल के बाहर फैली गंदगी और पार्किंग की बदहाली को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
अस्पताल के मुख्य गेट के बाहर वाहनों की पार्किंग के लिए जगह निर्धारित है, लेकिन वहां साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब बताई जा रही है। पार्किंग क्षेत्र में जगह-जगह कचरा जमा है और बारिश के बाद जलजमाव तथा कीचड़ की समस्या भी बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में मरीजों को लेकर अस्पताल पहुंचने वाले लोगों के लिए वाहन खड़ा करना मुश्किल हो जाता है। इसके कारण कई लोग अपने वाहन सड़क के किनारे खड़े करने को मजबूर होते हैं, जिससे अस्पताल के बाहर यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की संभावना बनी रहती है।
अर्जुन मुंडा ने इस स्थिति को लेकर सोशल मीडिया के माध्यम से भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सवाल उठाया कि अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील स्थान के बाहर इस तरह की गंदगी के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है और सफाई व्यवस्था की निगरानी की जवाबदेही किसकी है। उनका कहना था कि अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को बेहतर और स्वच्छ वातावरण मिलना चाहिए।
एमजीएम अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। ऐसे में अस्पताल के प्रवेश मार्ग और पार्किंग क्षेत्र में कचरा, गंदा पानी और कीचड़ जमा रहना सिर्फ अव्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि इससे संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है। मरीजों के परिजनों का कहना है कि बीमारी की हालत में अस्पताल पहुंचने वाले लोगों को पहले ही काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में अस्पताल के बाहर की खराब व्यवस्था उनकी मुश्किलें और बढ़ा देती है।
करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से अस्पताल को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के अनुरूप विकसित किया गया है। इतनी बड़ी परियोजना के बावजूद यदि पार्किंग, जल निकासी और सफाई जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं सुचारू नहीं हैं तो इससे रखरखाव और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। लोगों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन और संबंधित विभाग को केवल अस्पताल की इमारत और चिकित्सा सुविधाओं पर ही नहीं, बल्कि आसपास के पूरे परिसर की स्वच्छता और यातायात व्यवस्था पर भी ध्यान देना चाहिए।
अर्जुन मुंडा के इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाए जाने के बाद अब संबंधित विभाग और अस्पताल प्रबंधन की भूमिका पर नजर रहेगी। लोगों को उम्मीद है कि अस्पताल के बाहर फैली गंदगी को हटाने के साथ पार्किंग क्षेत्र में जल निकासी, नियमित कचरा उठाव और वाहनों की व्यवस्थित पार्किंग की स्थायी व्यवस्था की जाएगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि अस्पताल के बाहर के इस हिस्से की सफाई और रखरखाव की जिम्मेदारी किस विभाग या एजेंसी की है और लापरवाही के लिए जवाबदेही किसकी तय होगी।

