गुवा। पश्चिमी सिंहभूम के गुवा स्थित सेल लौह अयस्क खदान में एग्जीक्यूटिव ऑफिसर दिवेंदु दास की मौत के बाद शुरू हुआ मजदूरों का आंदोलन सोमवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। मृत अधिकारी के परिवार के एक आश्रित को नौकरी देने की मांग को लेकर मजदूरों ने खदान में कर्मचारियों को ले जाने वाली बसों का परिचालन रोक दिया। इसके चलते खदान का उत्पादन और लौह अयस्क डिस्पैच प्रभावित रहा।
मजदूरों और प्रबंधन के बीच सोमवार को त्रिपक्षीय वार्ता आयोजित की गई, लेकिन बैठक में कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी। वार्ता विफल होने के बाद आंदोलन कर रहे मजदूरों ने साफ कर दिया कि जब तक दिवेंदु दास के आश्रित को नौकरी देने की मांग पर प्रबंधन सकारात्मक निर्णय नहीं लेता, तब तक चक्का जाम समाप्त नहीं किया जाएगा।
शनिवार की रात प्रथम चरण में शुरू हुआ बसों का विरोध सोमवार तक जारी रहा। खदान परिसर में जाने वाली बसों को रोके जाने के कारण कर्मचारियों की आवाजाही पर असर पड़ा और उत्पादन से जुड़ी गतिविधियां भी बाधित हुईं। आंदोलन स्थल पर मजदूरों की मौजूदगी बनी रही और विभिन्न मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी उनकी मांगों का समर्थन किया।
मजदूर संगठनों का कहना है कि दिवेंदु दास परिवार के लिए महत्वपूर्ण सहारा थे। उनकी अचानक मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयां उत्पन्न हो गई हैं। ऐसे में सेल प्रबंधन को मानवीय आधार पर मृतक की पत्नी को नौकरी देनी चाहिए। मजदूरों ने नियमानुसार मिलने वाले मुआवजे और अन्य लाभों का भुगतान सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई है।
जानकारी के अनुसार, 15 अगस्त को प्रथम पाली में ड्यूटी के दौरान दिवेंदु दास की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। उनके सीने में तेज दर्द होने के बाद सहकर्मी उन्हें गुवा सेल अस्पताल ले गए, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मजदूरों का दावा है कि उनकी तबीयत ड्यूटी के दौरान बिगड़ी और इसी आधार पर वे आश्रित को नौकरी देने की मांग कर रहे हैं।
बताया जाता है कि दिवेंदु दास की करीब दो वर्ष पहले आसनसोल से गुवा सेल खदान में नियुक्ति हुई थी। उनकी शादी को अभी लगभग एक वर्ष ही हुआ था। मजदूरों के अनुसार, वह अपने वृद्ध माता-पिता के इकलौते वारिस थे, जबकि उनकी पत्नी भी अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं। इसी पारिवारिक स्थिति को देखते हुए मजदूर उनकी पत्नी को सेल में नौकरी देने की मांग पर जोर दे रहे हैं।
हालांकि, दिवेंदु दास की मौत की परिस्थितियों को लेकर प्रबंधन और मजदूरों के पक्ष में अंतर सामने आया है। सेल के मुख्य महाप्रबंधक चंद्रभूषण कुमार के अनुसार, दिवेंदु दास की मौत घर जाने के दौरान रास्ते में हार्ट अटैक आने से हुई। वहीं, मजदूरों का कहना है कि उनकी तबीयत ड्यूटी के दौरान खराब हुई थी और उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हुई।
सोमवार को हुई त्रिपक्षीय वार्ता से समाधान नहीं निकलने के बाद आंदोलन और लंबा खिंचने के आसार हैं। बसों का परिचालन बाधित रहने से खदान में कर्मचारियों की आवाजाही प्रभावित है और उत्पादन एवं डिस्पैच पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है। मजदूरों ने मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया है, जिससे गुवा सेल खदान की सामान्य गतिविधियों पर आगे भी असर पड़ने की संभावना है।

