रांची। नक्सल विरोधी अभियानों और संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई में उल्लेखनीय भूमिका निभाने वाले झारखंड पुलिस के 37 पुलिसकर्मियों को प्रोन्नति दी गई है। पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार 12 दारोगाओं को इंस्पेक्टर के पद पर पदोन्नत किया गया है। इसके साथ ही एएसआई, हवलदार और आरक्षी स्तर के पुलिसकर्मियों को भी उनके उत्कृष्ट कार्य और साहस के आधार पर उच्चतर पद का लाभ दिया गया है।
यह प्रोन्नति पुलिस महानिदेशक की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय समिति की बैठक में लिए गए निर्णय के बाद दी गई है। पुलिस महानिरीक्षक मानवाधिकार की ओर से इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी किया गया। प्रोन्नति पाने वाले पुलिसकर्मियों को नक्सलियों तथा संगठित अपराध से जुड़े अभियानों में उनकी भूमिका और जोखिम उठाकर किए गए कार्य के आधार पर सम्मानित किया गया है।
इंस्पेक्टर के पद पर पदोन्नति पाने वाले दारोगाओं में सुशील टुडू, प्रभात रंजन राय, फागू होरो, रामेश्वर भगत, सत्येंद्र कुमार सिंह, अर्जुन कुमार सिंह, शैलेंद्र कुमार सिंह, कुंदन कुमार, रौशन कुमार सिंह, विक्रांत कुमार, सदानंद सिंह और विश्वजीत कुमार सिंह शामिल हैं।
पुलिस मुख्यालय के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रोन्नत पुलिसकर्मियों को वरीयता का लाभ उस बहादुरीपूर्ण घटना की तारीख से दिया जाएगा, जिसके आधार पर उन्हें पदोन्नति मिली है। हालांकि प्रोन्नत पद का बढ़ा हुआ वेतनमान और उससे संबंधित आर्थिक लाभ संबंधित पुलिसकर्मी को नए पद पर योगदान करने की तारीख से ही मिलेगा।
इंस्पेक्टर पद पर प्रोन्नति के अलावा विभिन्न जिलों और पुलिस इकाइयों में तैनात हवलदारों तथा आरक्षियों को भी पदोन्नति का लाभ मिला है। गुमला, सिमडेगा, खूंटी, हजारीबाग और रांची में कार्यरत कई पुलिसकर्मियों को हवलदार से एएसआई तथा आरक्षी से हवलदार के पद पर प्रोन्नत किया गया है। कुछ मामलों में पुलिसकर्मियों को पूर्व प्रभाव से वरीयता का लाभ भी प्रदान किया गया है।
पुलिस मुख्यालय ने सभी संबंधित जिलों के वरीय पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक और समादेष्टाओं को निर्देश दिया है कि प्रोन्नत पुलिसकर्मियों को उनके नए पद पर पदस्थापित करने और योगदान की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत पूरी की जाए। आदेश के बाद संबंधित पुलिसकर्मियों और उनके सहकर्मियों में खुशी का माहौल है।
पुलिस विभाग के स्तर पर इस प्रोन्नति को उन कर्मियों के मनोबल को बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है, जिन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों और अपराध के खिलाफ अभियानों में चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच जिम्मेदारी निभाई। अधिकारियों का मानना है कि ऐसे मामलों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों को प्रोत्साहन मिलने से भविष्य में भी जवानों को कठिन परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलेगी।

