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बारिश के बीच आठवें दिन भी जारी रहा रांजाबुरु खदान में ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन आंदोलन

गुवा। पश्चिमी सिंहभूम जिले के गुवा सेल की रांजाबुरु खदान में स्थानीय रोजगार और पूर्व में किए गए लिखित समझौते को पूरी तरह लागू करने की मांग को लेकर ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन आंदोलन सोमवार को आठवें दिन भी जारी रहा। 10 अगस्त से सारंडा विकास समिति, जामकुंडिया-दुईया के बैनर तले शुरू हुए आंदोलन में लगातार हो रही बारिश के बावजूद ग्रामीणों की भागीदारी बनी रही। महिला और पुरुष ग्रामीण बारिश के बीच आंदोलन स्थल पर डटे रहे और अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की।

आंदोलनकारियों का कहना है कि खदान प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीण लंबे समय से स्थानीय स्तर पर रोजगार, रैक लोडिंग, ट्रांसपोर्टिंग और अन्य आर्थिक गतिविधियों में प्राथमिकता दिए जाने की मांग करते रहे हैं। पूर्व में इन मांगों को लेकर लिखित समझौता भी हुआ था, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार समझौते के सभी बिंदुओं को अब तक पूरी तरह धरातल पर लागू नहीं किया गया है। इसी के विरोध में ग्रामीणों ने अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया है।

आठवें दिन आंदोलन स्थल पर गंगदा पंचायत के मुखिया राजू सांडिल, मानकी लागुड़ा देवगम, मुंडा बुधराम सिद्धू, मुंडा कुशु देवगम, मुंडा जामदेव चांपिया, मुंडा जानुम सिंह चेरोवा, मुंडा लेबेया देवगम और मुंडा राजेश समेत विभिन्न गांवों के ग्रामीण मौजूद रहे। नेतृत्वकर्ताओं ने ग्रामीणों के साथ आंदोलन स्थल पर रहकर उनकी मांगों के प्रति समर्थन जताया।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में खदान से प्रभावित 18 गांवों के युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देना, 75 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना, रैक लोडिंग और ट्रांसपोर्टिंग के कार्यों में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना तथा पूर्व में हुए लिखित समझौते के सभी बिंदुओं को लागू करना शामिल है।

ग्रामीणों का कहना है कि खनन गतिविधियों का प्रत्यक्ष प्रभाव क्षेत्र के लोगों की जमीन, जंगल और प्राकृतिक संसाधनों पर पड़ता है। ऐसे में खदान से होने वाली आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता मिलना उनका अधिकार है। उनका आरोप है कि लंबे समय से मांग उठाने के बावजूद अपेक्षित स्तर पर समाधान नहीं हुआ, जिसके कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा। ग्रामीणों का कहना है कि अब केवल आश्वासन के आधार पर आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। लिखित समझौते के सभी बिंदुओं को वास्तविक रूप से लागू करने और स्थानीय रोजगार से जुड़ी मांगों पर ठोस निर्णय होने के बाद ही आंदोलन समाप्त करने पर विचार किया जाएगा।

लगातार बारिश के बावजूद आठवें दिन आंदोलन स्थल पर ग्रामीणों की मौजूदगी से यह साफ है कि स्थानीय लोगों में अपनी मांगों को लेकर एकजुटता बनी हुई है। ग्रामीणों ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक रांजाबुरु खदान के समक्ष उनका अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी रहेगा।

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