जमशेदपुर: केरला पब्लिक स्कूल, कदमा ने झारखंड के पहले यूनेस्को एएसपीनेट स्कूल के रूप में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। स्कूल को 6 मार्च 2026 को आधिकारिक रूप से यूनेस्को के एसोसिएटेड स्कूल नेटवर्क में शामिल किया गया। इसके साथ ही स्कूल शांति, सतत विकास, वैश्विक नागरिकता और विभिन्न संस्कृतियों के बीच समझ को बढ़ावा देने वाले अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक नेटवर्क का हिस्सा बन गया है।
यह उपलब्धि किसी एक कार्यक्रम या एक दिन की कोशिश का नतीजा नहीं है। केरला पब्लिक स्कूल, कदमा ने वर्ष 2023 में वैश्विक स्कूल गठबंधन से जुड़ने और यूनेस्को एएसपीनेट की सदस्यता के लिए आवेदन करने के साथ इस दिशा में अपनी यात्रा शुरू की थी। इसके बाद स्कूल ने विद्यार्थियों को अलग-अलग देशों के छात्रों और शिक्षकों से जोड़ने तथा वैश्विक मुद्दों पर संवाद के अवसर उपलब्ध कराने पर लगातार काम किया।
2024 में अंतरराष्ट्रीय सहयोग का बढ़ा दायरा
वर्ष 2024 में केरला पब्लिक स्कूल, कदमा के अंतरराष्ट्रीय सहयोग का दायरा और व्यापक हुआ। स्कूल के विद्यार्थी अर्जेंटीना, ताइवान, ऑस्ट्रेलिया, जापान, थाईलैंड, ब्रिटेन और अमेरिका के स्कूलों तथा विद्यार्थियों से जुड़े। इन गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों में संवाद, सहयोग, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक संवेदनशीलता विकसित करने के साथ उन्हें स्थानीय परिवेश से आगे वैश्विक दृष्टिकोण देना था।
नवंबर 2024 में स्कूल के विद्यार्थियों ने इंडोनेशिया, मिस्र और ग्रीस के विद्यार्थियों के साथ सतत विकास और पुनर्योजी अर्थव्यवस्था पर यूनेस्को के ऑनलाइन कार्यक्रम में भाग लिया। इससे जमशेदपुर में बैठे विद्यार्थियों को दुनिया के दूसरे हिस्सों के छात्रों के साथ सीधे संवाद करने का अवसर मिला।
जलवायु जागरूकता से कार्रवाई तक पहुंची पहल
वर्ष 2025 में स्कूल की अंतरराष्ट्रीय गतिविधियां केवल संवाद और सहभागिता तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि ठोस पहल की दिशा में आगे बढ़ीं। अंतरराष्ट्रीय ग्लेशियर संरक्षण वर्ष की शुरुआत के बाद केरला पब्लिक स्कूल, कदमा ने ऑनलाइन कार्यक्रम के माध्यम से भागीदारी की संभावनाएं तलाशीं। इसके बाद ‘क्राई फॉर आइस—एक्ट नाउ!’ पहल शुरू की गई। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को जलवायु और पर्यावरण के क्षेत्र में काम कर रहे विशेषज्ञों से सीधे संवाद का अवसर मिला।
इस पहल के तहत विद्यार्थियों ने भारत के ‘सोलर मैन’ के नाम से पहचाने जाने वाले डॉ. चेतन सिंह सोलंकी, टाटा स्टील के एडवेंचर कार्यक्रम से जुड़े हेमंत गुप्ता और अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय की हिमनद विज्ञानी डॉ. रेया नंदी बौदुरी से संवाद किया। स्कूल का जोर इस बात पर रहा कि विद्यार्थी जलवायु परिवर्तन के बारे में केवल किताबों से जानकारी हासिल न करें, बल्कि इस विषय पर शोध और समाधान के लिए काम कर रहे विशेषज्ञों से भी सीधे जुड़ें।
इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए स्कूल ने ‘कक्षा से जलवायु कार्रवाई’ पहल के माध्यम से विद्यार्थियों को पर्यावरणीय समस्याओं को समझने, समाधान तलाशने, कार्रवाई करने और अपने अनुभवों को दर्ज करने की प्रक्रिया से जोड़ा।
2026 में आपदा प्रबंधन और विज्ञान पर ज़ोर
यूनेस्को एएसपीनेट की सदस्यता मिलने के बाद स्कूल ने अपनी गतिविधियों का दायरा और बढ़ाया है। वर्ष 2026 में ‘सुनामी यूनाइटेड’ पहल के तहत विद्यार्थियों को सुनामी विज्ञान, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, आपदा तैयारी, सामुदायिक जागरूकता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के रचनात्मक इस्तेमाल से जोड़ा जा रहा है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य 27 सदस्य देशों के करीब 60 स्कूलों के कम से कम 350 विद्यार्थियों और 150 शिक्षकों को जोड़ना है।
जुलाई और अगस्त 2026 के बीच स्कूल ने छात्र-नेतृत्व वाली अंतरराष्ट्रीय पॉडकास्ट श्रृंखला ‘ब्रेकिंग बैरियर्स : विज्ञान में महिलाओं की आवाज’ भी शुरू की। इस पहल के तहत विद्यार्थी वैज्ञानिकों से बातचीत कर रहे हैं, उनके शोध और उपलब्धियों को समझ रहे हैं तथा विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका पर चर्चा कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों से सीधे संवाद करेंगे विद्यार्थी
इस पहल के तहत खगोल भौतिकी, ग्रह विज्ञान, अंतरिक्ष विज्ञान, जनरेटिव कृत्रिम बुद्धिमत्ता और जैव विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञों के साथ संवाद की योजना बनाई गई है। 28 अगस्त 2026 को केरला पब्लिक स्कूल, कदमा के विद्यार्थी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय की प्रोफेसर सारा टिशमैन के साथ बातचीत करेंगे। वह एकल-कोशिका जीनोमिक्स और मानव कोशिका एटलस से जुड़े अपने कार्य के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचानी जाती हैं। उन्हें वर्ष 2026 के लोरियल-यूनेस्को ‘विज्ञान में महिलाओं के लिए’ अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित होने वाली पांच वैज्ञानिकों में चुना गया है।
दक्षिण अफ्रीका की प्रोफेसर लिलियन जह ने भी केरला पब्लिक स्कूल, कदमा के निमंत्रण को स्वीकार किया है। उनके साथ बातचीत की तारीख तय की जा रही है। स्कूल के लिए यह विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिकों से सीधे जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर है।
यूनेस्को के साथ भी सीधे संपर्क
केरला पब्लिक स्कूल, कदमा ने दक्षिण एशिया के लिए यूनेस्को के क्षेत्रीय कार्यालय के निदेशक और भूटान, भारत, मालदीव तथा श्रीलंका के लिए यूनेस्को प्रतिनिधि टीम से भी संपर्क किया है। इस दौरान स्कूल की एएसपीनेट यात्रा, छात्र-नेतृत्व वाली पॉडकास्ट पहल और व्यापक शैक्षणिक योजनाओं को साझा किया गया। यूनेस्को टीम के साथ 13 अगस्त 2026 को बैठक निर्धारित की गई है।
स्कूल के लिए यूनेस्को एएसपीनेट की सदस्यता केवल परिसर में प्रमाणपत्र लगाने तक सीमित उपलब्धि नहीं है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को वैश्विक सहयोग, पर्यावरणीय जिम्मेदारी, विज्ञान, तकनीक और विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद का वास्तविक अनुभव देना है।
तीन साल की यात्रा ने बदली शिक्षा की दिशा
केरला पब्लिक स्कूल, कदमा की 2023 से 2026 तक की यात्रा इस बदलाव को स्पष्ट करती है। वर्ष 2023 में अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ने की शुरुआत हुई। 2024 में वैश्विक सहयोग बढ़ा। 2025 में जलवायु और पर्यावरण से जुड़ी गतिविधियों को कार्रवाई का रूप दिया गया और 2026 में यूनेस्को एएसपीनेट की आधिकारिक सदस्यता के साथ छात्र-नेतृत्व वाली अंतरराष्ट्रीय पहलों का विस्तार हुआ।
स्कूल का लक्ष्य अब इस उपलब्धि को नियमित शैक्षणिक गतिविधियों में बदलना है, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई में वैश्विक सहयोग, पर्यावरणीय जिम्मेदारी, विज्ञान एवं तकनीकी नवाचार और अंतर-सांस्कृतिक समझ को लगातार शामिल किया जा सके।
जमशेदपुर के एक स्कूल से शुरू हुई यह पहल अब विद्यार्थियों को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के छात्रों, वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों से जोड़ रही है। स्कूल के लिए यूनेस्को एएसपीनेट की सदस्यता इसी सोच का विस्तार है—विद्यार्थियों को केवल जानकारी हासिल करने वाला नहीं, बल्कि सवाल पूछने, संवाद करने और वैश्विक स्तर पर अपनी भागीदारी दर्ज कराने वाला विद्यार्थी तैयार करना।

