चाईबासा: विश्व आदिवासी दिवस की पूर्व संध्या पर शनिवार को जिला बार एसोसिएशन के प्रांगण में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद ने की, जबकि मंच संचालन कालीचरण बोदरा ने किया। कार्यक्रम में अधिवक्ताओं ने आदिवासी उत्थान, परंपरा, संस्कृति और विश्व आदिवासी दिवस के महत्व पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम में बार एसोसिएशन के वरिष्ठ और कनिष्ठ अधिवक्ताओं ने आदिवासी समाज के विकास, अधिकारों, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। रघुनाथ लामाय, रामेश्वर जेराई, राजेन्द्र जोंको, मधु बानरा, लाल दिग्गी, रतनी सुम्बरूई, हिरामनी हाईबुरू, पूर्ण चन्द्र कायम, सुरेन्द्र पुरती, सुभाष मिश्रा और शरण पान सहित अन्य अधिवक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संयोजन लक्ष्मी सिंकु ने किया।
वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपराएं देश की विविधतापूर्ण सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। विश्व आदिवासी दिवस आदिवासी समाज के अधिकारों, सामाजिक विकास, परंपराओं और संस्कृति के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर है। उन्होंने आदिवासी समाज की पहचान और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम में जिला बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष कैशर परवेज, सचिव अगिस्तन कुल्लु और पूर्व महासचिव आशिष सिन्हा मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के आयोजन में अधिवक्ता हरिश सांडिल, अनिल सुन्डी, अमर बख्शी, मंगल मेलगांडी, दामोदर विश्वकर्मा, राजेश नाग, तिरिज तिरिया, कमल हेम्ब्रम, विनय कालुन्डिया, नरेन्द्र तियु, विक्रम मुण्डा, महेन्द्र जामुदा, नरेश सुन्डी, रामलाल किनबो, सुरज सामड, लक्ष्मी सिंकू, संयोगिता बिरुवा, पूनम बिरूली, आश्वीन हांसदा, मनीष देवगम, वीरसिंह बिरूली, बामन बिरुवा, रोशन गागराई, छोटे लाल बानरा, अंजु हेम्ब्रम, बिरजू बोदरा समेत अन्य अधिवक्ताओं का सहयोग रहा।

