जमशेदपुर। सीतारामडेरा क्षेत्र अंतर्गत भुइयांडीह स्थित कल्याणनगर एवं इंद्रानगर में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेश के अनुपालन में प्रस्तावित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के संबंध में जमशेदपुर पूर्वी की विधायक पूर्णिमा साहू लगातार सक्रिय हैं। प्रभावित परिवारों के हितों की रक्षा, मानवीय दृष्टिकोण से राहत एवं पुनर्वास सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से उन्होंने अब तक प्रशासनिक, कानूनी एवं राजनीतिक स्तर पर लगातार पहल की है।
बुधवार को विधायक पूर्णिमा साहू ने झारखंड विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कक्ष में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर कल्याणनगर एवं इंद्रानगर के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। इस दौरान दोनों बस्तियों के चार प्रतिनिधि भी उनके साथ मौजूद रहे। पूर्णिमा साहू ने मुख्यमंत्री को बस्तीवासियों की वर्तमान स्थिति, उनकी समस्याओं और संभावित विस्थापन से उत्पन्न होने वाली कठिनाइयों से विस्तारपूर्वक अवगत कराया।
उन्होंने कहा कि भारी वर्षा के मौसम में गरीब परिवारों को बेघर करना मानवीय दृष्टिकोण से उचित नहीं है। ऐसे समय में प्रस्तावित कार्रवाई को तत्काल स्थगित किया जाना चाहिए और प्रभावित परिवारों को राहत प्रदान की जानी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से यह भी आग्रह किया कि जिला प्रशासन सभी प्रभावित परिवारों का सर्वेक्षण कर उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सूचीबद्ध करे तथा सम्मानजनक पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाए।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधायक पूर्णिमा साहू को आश्वस्त किया कि वे इस पूरे मामले में जिला प्रशासन से विस्तृत प्रतिवेदन प्राप्त कर आवश्यक स्तर पर विचार-विमर्श करेंगे।
मुख्यमंत्री से मुलाकात के उपरांत विधायक पूर्णिमा साहू ने राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर से भी भेंट कर पूरे मामले की जानकारी दी। वित्त मंत्री ने भी उन्हें आश्वस्त किया कि वे जिला प्रशासन से इस विषय पर चर्चा कर आवश्यक पहल करेंगे।
इससे पूर्व, 29 जुलाई को जैसे ही प्रस्तावित कार्रवाई की जानकारी मिली, विधायक पूर्णिमा साहू स्वयं कल्याणनगर एवं इंद्रानगर पहुंचीं और प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को सुना। वहीं से उन्होंने जिला उपायुक्त राजीव रंजन से दूरभाष पर बातचीत कर बरसात के मौसम में किसी भी गरीब परिवार का आशियाना न उजाड़ने का आग्रह किया। उन्होंने पुनर्वास की समुचित व्यवस्था होने तक कार्रवाई स्थगित रखने तथा 145 प्रभावित परिवारों को आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर प्रधानमंत्री आवास योजना से जोड़ते हुए सम्मानजनक पुनर्वास सुनिश्चित करने की मांग की।
इसके अगले दिन 30 जुलाई को विधायक पूर्णिमा साहू बस्तीवासियों के साथ जिला उपायुक्त राजीव रंजन से उनके कार्यालय में मिलीं। इस दौरान उन्होंने प्रभावित परिवारों की वर्तमान स्थिति, उनकी भावनाओं एवं समस्याओं से जिला प्रशासन को अवगत कराया। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि 29 जुलाई को एनजीटी में हुई सुनवाई की आदेश प्रति अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। विधायक ने आग्रह किया कि आदेश की प्रति उपलब्ध होने एवं उसके विधिक अध्ययन के बाद ही आगे की प्रक्रिया तय की जाए एवं मानवीय आधार पर प्रभावित परिवारों को पर्याप्त समय दिया जाए। उन्होंने बस्तीवासियों को यह भरोसा भी दिलाया कि आवश्यकता पड़ने पर न्याय के लिए झारखंड उच्च न्यायालय का भी रुख किया जाएगा।
इसी क्रम में बस्तीवासियों से विचार-विमर्श एवं विधिक परामर्श के बाद JPLE वाद से संबंधित सभी प्रमाणित दस्तावेज अंचल कार्यालय, जमशेदपुर से प्राप्त कर 4 अगस्त को डीसी कोर्ट में अपील दाखिल कराई गई। साथ ही, राज्य सरकार से लगातार संवाद जारी है ताकि प्रस्तावित कार्रवाई को स्थगित कराया जा सके। आवश्यकता पड़ने पर झारखंड उच्च न्यायालय में भी कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी की जा रही है।
विधायक पूर्णिमा साहू ने कहा कि कानून का सम्मान करते हुए यह सुनिश्चित होना चाहिए कि किसी भी गरीब परिवार के साथ अन्याय न हो। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार इस विषय पर संवेदनशीलता के साथ सकारात्मक निर्णय लेते हुए प्रभावित परिवारों को राहत एवं सम्मानजनक पुनर्वास उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि इस मामले में वे पूरी प्रतिबद्धता के साथ बस्तीवासियों के साथ खड़ी हैं।

