जमशेदपुर। जीवन की भागदौड़ में बहुत कुछ बदल जाता है। समय के साथ चेहरे बदलते हैं, जिम्मेदारियाँ बढ़ती हैं और मुलाकातें कम हो जाती हैं, लेकिन कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जो वक्त की हर कसौटी पर खरे उतरते हैं। दोस्ती ऐसा ही एक रिश्ता है, जो न केवल जीवन को खूबसूरत बनाता है, बल्कि कठिन से कठिन दौर में भी संबल देता है। फ्रेंडशिप डे के अवसर पर हर किसी के मन में अपने पुराने दोस्तों और उनसे जुड़ी अनगिनत यादें फिर से ताजा हो उठती हैं।
बचपन और स्कूल के दिन शायद इसलिए सबसे खास माने जाते हैं क्योंकि वहीं सच्ची दोस्ती की नींव पड़ती है। साथ बैठकर पढ़ाई करना, टिफिन साझा करना, खेल के मैदान में घंटों मस्ती करना, छोटी-छोटी बातों पर रूठना और फिर अगले ही पल सब कुछ भूलकर साथ हंसना, ये पल उम्र भर दिल में बसे रहते हैं। उस दौर में दोस्ती दिखावे की नहीं, बल्कि अपनापन और विश्वास की होती थी। न सोशल मीडिया था और न ही मोबाइल फोन, फिर भी दोस्तों तक पहुंचने के लिए केवल एक आवाज या घर के बाहर से पुकार लेना ही काफी होता था।
फ्रेंडशिप डे का भी अपना अलग ही उत्साह हुआ करता था। रंग-बिरंगे फ्रेंडशिप बैंड, नोटबुक के आखिरी पन्नों पर लिखे संदेश और हमेशा साथ निभाने के वादे आज भी लोगों की स्मृतियों का हिस्सा हैं। उन छोटे-छोटे उपहारों की कीमत शायद ज्यादा नहीं होती थी, लेकिन उनमें छिपा स्नेह और अपनापन अनमोल होता था। दोस्त के लिए अपनी पसंद की चीज छोड़ देना या आखिरी निवाला उसके साथ बांटना ही सच्ची मित्रता की पहचान थी।
समय के साथ जीवन की दिशा बदलती गई। पढ़ाई खत्म हुई, नौकरी और व्यवसाय की जिम्मेदारियां आईं, परिवार बढ़ा और प्राथमिकताएं बदल गईं। कई दोस्त अलग-अलग शहरों और देशों में जा बसे। पहले जो रोज मिलते थे, अब महीनों और कई बार वर्षों तक बातचीत भी नहीं हो पाती। इसके बावजूद जब कभी किसी पुराने दोस्त का फोन आता है या कोई पुरानी तस्वीर सामने आ जाती है, तो ऐसा लगता है जैसे समय थम गया हो। वर्षों की दूरी कुछ ही मिनटों की बातचीत में मिट जाती है और पुराने किस्से फिर से जीवंत हो उठते हैं।
दरअसल, सच्ची दोस्ती रोज मिलने या लगातार बातचीत करने पर निर्भर नहीं करती। इसका आधार विश्वास, सम्मान और आत्मीयता होती है। यही कारण है कि मुश्किल समय में जब कई रिश्ते कमजोर पड़ जाते हैं, तब एक सच्चा मित्र बिना किसी स्वार्थ के साथ खड़ा नजर आता है। उसका एक शब्द, एक सलाह या केवल कंधे पर रखा हाथ भी हिम्मत देने के लिए काफी होता है।
भारतीय संस्कृति में भी मित्रता को विशेष महत्व दिया गया है। श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता आज भी निस्वार्थ प्रेम, समानता और आत्मीय संबंधों का सबसे बड़ा उदाहरण मानी जाती है। यह कथा बताती है कि सच्चे मित्र के लिए धन-दौलत, पद या प्रतिष्ठा का कोई महत्व नहीं होता, बल्कि दिलों का जुड़ाव ही सबसे बड़ा रिश्ता होता है।
आज तकनीक ने लोगों को पहले से कहीं अधिक जोड़ दिया है। मोबाइल और सोशल मीडिया के माध्यम से हजारों लोगों से संपर्क संभव है, लेकिन आत्मीय रिश्तों के लिए समय लगातार कम होता जा रहा है। मित्रों की सूची लंबी जरूर हो गई है, मगर दिल की बात कहने वाले दोस्त पहले जैसे कम नजर आते हैं। ऐसे समय में पुराने दोस्तों को याद करना और उनसे दोबारा जुड़ना केवल भावनात्मक बात नहीं, बल्कि रिश्तों को जीवित रखने की जरूरत भी है।
फ्रेंडशिप डे का वास्तविक उद्देश्य केवल सोशल मीडिया पर शुभकामनाएं देना या उपहारों का आदान-प्रदान करना नहीं है। यह उन मित्रों के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर है जिन्होंने जीवन के हर उतार-चढ़ाव में साथ निभाया, गलतियों पर समझाया, सफलता में खुशियां साझा कीं और असफलता में हौसला बढ़ाया।
इस खास दिन पर यदि किसी पुराने दोस्त को केवल एक फोन कर यह पूछ लिया जाए कि “कैसे हो?” या यह कह दिया जाए कि “बहुत दिनों से तुम्हारी याद आ रही थी”, तो शायद यही सबसे बड़ा उपहार होगा। ऐसे कुछ शब्द वर्षों की दूरी को पलभर में खत्म कर सकते हैं और पुराने रिश्तों में फिर से नई गर्माहट भर सकते हैं।
समय लगातार आगे बढ़ता रहता है, लेकिन सच्ची दोस्ती कभी पुरानी नहीं होती। वह यादों में हमेशा ताजा रहती है और हर फ्रेंडशिप डे पर हमें यह एहसास कराती है कि जीवन की सबसे बड़ी पूंजी धन या प्रसिद्धि नहीं, बल्कि वे दोस्त हैं जो हर परिस्थिति में बिना किसी शर्त के हमारे साथ खड़े रहते हैं। यही मित्रता जीवन को अर्थ देती है और यादों को हमेशा मुस्कुराने की वजह बनाती है।
लेखक एवं कवि वरुण कुमार के सौजन्य से।

