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नई दिल्ली में झारखंड स्टेकहोल्डर्स मीट में सिंहभूम चैंबर की सक्रिय भागीदारी, ₹86 हजार करोड़ के निवेश प्रस्तावों का किया स्वागत

जमशेदपुर, 10 जुलाई: सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एससीसीआई) ने नई दिल्ली के ताज पैलेस होटल में आयोजित झारखंड स्टेकहोल्डर्स मीट में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए राज्य की प्रस्तावित औद्योगिक एवं निवेश प्रोत्साहन नीति-2026 पर महत्वपूर्ण सुझाव दिए। चैंबर की ओर से उद्योग उपाध्यक्ष हर्ष बकरेवाल और उद्योग सचिव विनोद शर्मा ने प्रतिनिधित्व किया।

बैठक का उद्देश्य ड्राफ्ट झारखंड औद्योगिक एवं निवेश प्रोत्साहन नीति-2026 पर उद्योग जगत और अन्य हितधारकों से सुझाव प्राप्त करना था, ताकि झारखंड को देश के सबसे आकर्षक निवेश स्थलों में शामिल किया जा सके।

बैठक के दौरान सिंहभूम चैंबर ने संतोष जताया कि उसके कई महत्वपूर्ण सुझावों को ड्राफ्ट नीति में शामिल किया गया है। चैंबर ने उद्योगों को त्वरित एवं निर्बाध स्वीकृतियां देने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम को और प्रभावी बनाने तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए एआई आधारित “झारखंड एमएसएमई कनेक्ट पोर्टल” शुरू करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके माध्यम से उद्यमियों को डिजिटल सेवाएं, आवश्यक जानकारी और हैंडहोल्डिंग सहायता उपलब्ध कराने की बात कही गई।

बैठक की सबसे बड़ी उपलब्धि ₹86,000 करोड़ के प्रस्तावित निवेश से जुड़े 14 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर रही। इसे झारखंड में निवेशकों के बढ़ते विश्वास का संकेत माना जा रहा है।

इस दौरान जिंदल समूह के अध्यक्ष नवीन जिंदल ने झारखंड में ₹71,000 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव रखा। इसमें ₹40,000 करोड़ की लागत से 6 एमटीपीए क्षमता का एकीकृत इस्पात संयंत्र, ₹30,000 करोड़ की परमाणु ऊर्जा परियोजना और ₹700 करोड़ की सौर ऊर्जा परियोजना स्थापित करने की योजना शामिल है।

वहीं, टाटा स्टील ने भी राज्य में ₹19,000 करोड़ के निवेश से इलेक्ट्रिकल स्टील प्लांट स्थापित करने की घोषणा की। यह संयंत्र इलेक्ट्रिक वाहन, ट्रांसफॉर्मर और उन्नत विनिर्माण क्षेत्र की बढ़ती मांग को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा।

सिंहभूम चैंबर ने इन निवेश प्रस्तावों और प्रस्तावित औद्योगिक नीति का स्वागत करते हुए कहा कि इससे झारखंड में औद्योगिकीकरण, आधारभूत संरचना का विकास, रोजगार के नए अवसर और राज्य की आर्थिक प्रगति को नई गति मिलेगी। चैंबर ने राज्य सरकार के साथ मिलकर उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने और सतत औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई।

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