जमशेदपुर। बर्मामाइंस स्थित गोदाम में काम बंद किए जाने की सूचना के बाद वहां वर्षों से कार्यरत मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। इसे लेकर मजदूरों ने मंगलवार को पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर हस्तक्षेप की मांग की है। मजदूरों का कहना है कि वे कई दशकों से इस गोदाम में कार्य कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं, लेकिन अब गोदाम का काम पूरी तरह बंद किए जाने से उनके सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है।
ज्ञापन में मजदूरों ने बताया कि जब से निगम का गठन हुआ है, तब से वे बर्मामाइंस गोदाम में कार्यरत हैं। उनके पूर्वज भी इसी गोदाम में काम करते रहे हैं। पहले भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) से खाद्यान्न इस गोदाम तक पहुंचता था और इसके माध्यम से उन्हें रोजगार मिलता था। पिछले 40 से 50 वर्षों से उनका परिवार इसी काम पर निर्भर है।
मजदूरों का कहना है कि विभाग द्वारा गोदाम का काम उनसे पूरी तरह छीन लिया जा रहा है। इससे उनके परिवार के भरण-पोषण पर संकट गहरा गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का संकल्प है कि देश का कोई भी नागरिक भूखा नहीं सोए, लेकिन गोदाम का काम बंद होने से उनके परिवारों के सामने भुखमरी जैसी स्थिति पैदा होने की आशंका है।
मजदूरों ने उपायुक्त से मांग की है कि उनके हितों को ध्यान में रखते हुए बर्मामाइंस गोदाम में पहले की तरह काम जारी रखने की व्यवस्था की जाए, ताकि उनकी आजीविका सुरक्षित रह सके।
ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वालों में मोलाय सोरेन, जगदीश प्रसाद, सुतिन बारिक, गणेश, विकास सिंह, सचेत हेंब्रम, हीरामल साय, रागन मार्डी सहित अन्य मजदूर शामिल हैं। मजदूरों ने प्रशासन से जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है।

