चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिले के अतिनक्सल प्रभावित गोइलकेरा प्रखंड के गुरगुड़िया गांव में वज्रपात की घटना के बाद अंधविश्वास एक व्यक्ति के लिए जानलेवा साबित हुआ। गुरुवार शाम करीब चार बजे बारिश के दौरान गिरे आकाशीय बिजली की चपेट में आने से 51 वर्षीय पुतुल नायक और 48 वर्षीय प्रशांत गोप गंभीर रूप से झुलस गए। हादसे के बाद दोनों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने के बजाय ग्रामीणों और परिजनों ने पारंपरिक मान्यता के तहत उनके शरीर पर गोबर का लेप लगाकर उपचार करने का प्रयास किया। इस दौरान काफी समय बीत गया, जिससे पुतुल नायक की हालत लगातार बिगड़ती चली गई।
जब घरेलू और पारंपरिक उपायों से कोई फायदा नहीं हुआ तो परिजन दोनों घायलों को निजी वाहन से चाईबासा सदर अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने दोनों का इलाज शुरू किया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। इलाज के दौरान पुतुल नायक ने दम तोड़ दिया, जबकि गंभीर रूप से झुलसे प्रशांत गोप को प्राथमिक उपचार के बाद इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया गया है, जहां उनकी हालत चिंताजनक बनी हुई है।
ग्रामीण क्षेत्र में आज भी वज्रपात जैसी घटनाओं के बाद वैज्ञानिक उपचार के बजाय अंधविश्वास और पारंपरिक तरीकों पर भरोसा किए जाने की प्रवृत्ति सामने आती रहती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वज्रपात की चपेट में आए व्यक्ति को बिना समय गंवाए नजदीकी अस्पताल पहुंचाना ही उसकी जान बचाने का सबसे प्रभावी उपाय है। इलाज में थोड़ी भी देरी मरीज की जान पर भारी पड़ सकती है।
पुतुल नायक की मौत के बाद उनके परिवार में मातम पसरा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

