मुंबई। टाटा स्टील लिमिटेड की 119वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) गुरुवार को आयोजित हुई। इस अवसर पर कंपनी के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने अपने संबोधन में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी के प्रदर्शन, भविष्य की रणनीति, भारत और यूरोप में विस्तार योजनाओं, डिजिटल परिवर्तन तथा हरित इस्पात उत्पादन की दिशा में उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 की शुरुआत वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल के साथ हुई थी। वैश्विक आर्थिक वृद्धि, महंगाई में कमी और बेहतर वित्तीय परिस्थितियों से उम्मीदें बढ़ी थीं। भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते और अंतरिम भारत-अमेरिका व्यापार समझौते जैसे सकारात्मक घटनाक्रम भी सामने आए। हालांकि मार्च में पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा, उत्पादन में गिरावट और महंगाई में वृद्धि देखी गई। इसके बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रही और घरेलू मांग तथा विनिर्माण क्षेत्र के दम पर वित्त वर्ष 2026 में 7.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।
चेयरमैन ने कहा कि वैश्विक इस्पात उद्योग के लिए यह वर्ष चुनौतीपूर्ण रहा। कैलेंडर वर्ष 2025 में वैश्विक इस्पात उत्पादन दो प्रतिशत घटकर 1.85 अरब टन रह गया। चीन की सुस्ती, पश्चिमी देशों में कमजोर मांग, लागत में उतार-चढ़ाव और नियामकीय दबाव इसके प्रमुख कारण रहे। इसके विपरीत भारत का इस्पात उद्योग लगातार मजबूत बना रहा। देश में इस्पात उत्पादन 10.7 प्रतिशत बढ़कर 168.4 मिलियन टन और मांग 7.6 प्रतिशत बढ़कर 163.7 मिलियन टन हो गई। यह वृद्धि बुनियादी ढांचा, निर्माण, ऑटोमोबाइल और औद्योगिक क्षेत्रों की मजबूत मांग के कारण संभव हुई।
उन्होंने बताया कि टाटा स्टील ने वित्त वर्ष 2026 में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन किया। कंपनी की समेकित आय छह प्रतिशत बढ़कर 2,32,140 करोड़ रुपये रही। भारत में कंपनी ने लगभग 23.4 मिलियन टन कच्चे इस्पात का रिकॉर्ड उत्पादन किया और लगभग 22.5 मिलियन टन इस्पात की आपूर्ति की। कंपनी का समेकित ईबीआईटीडीए 35 प्रतिशत बढ़कर 34,848 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि कर पश्चात लाभ 243 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 10,886 करोड़ रुपये रहा। भारत में कंपनी की आय 1,40,302 करोड़ रुपये और ईबीआईटीडीए 34,272 करोड़ रुपये रहा। बेहतर लागत नियंत्रण, उच्च मूल्य वाले उत्पादों की बिक्री और उत्पादन में वृद्धि के कारण ईबीआईटीडीए मार्जिन बढ़कर 24 प्रतिशत हो गया। कंपनी का समेकित शुद्ध ऋण भी घटकर 80,144 करोड़ रुपये रह गया, जिससे उसकी वित्तीय स्थिति और मजबूत हुई।
उन्होंने जानकारी दी कि निदेशक मंडल ने वित्त वर्ष 2026 के लिए प्रति इक्विटी शेयर चार रुपये लाभांश देने की सिफारिश की है।
चंद्रशेखरन ने कहा कि भारत में कंपनी के विस्तार की दिशा में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल हुई हैं। कलिंगानगर संयंत्र के दूसरे चरण के विस्तार का सफल संचालन शुरू हो गया है, जिससे कंपनी की कुल उत्पादन क्षमता बढ़कर 26.1 मिलियन टन प्रतिवर्ष हो गई है। कलिंगानगर संयंत्र की क्षमता तीन मिलियन टन से बढ़ाकर आठ मिलियन टन प्रतिवर्ष कर दी गई है। यहां भारत की सबसे बड़ी ब्लास्ट फर्नेस और अत्याधुनिक कोल्ड रोलिंग मिल स्थापित की गई है, जिससे ऑटोमोबाइल, रक्षा और अन्य उच्च तकनीक वाले क्षेत्रों में कंपनी की स्थिति और मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि यह कंपनी के 40 मिलियन टन प्रतिवर्ष क्षमता हासिल करने के दीर्घकालिक लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने बताया कि कंपनी मूल्यवर्धित उत्पादों और डिजिटल कारोबार पर लगातार ध्यान दे रही है। रक्षा और जहाज निर्माण क्षेत्रों में भी कंपनी ने अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। ट्यूब, टिनप्लेट और वायर कारोबार में भी क्षमता विस्तार किया जा रहा है। वर्ष के दौरान टाटा स्टील कलर्स में स्वामित्व का एकीकरण और थ्रिवेणी पेलेट्स में बहुमत हिस्सेदारी का अधिग्रहण जैसे महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम उठाए गए। इसके अलावा एनआईएनएल के विस्तार और लुधियाना में 0.75 मिलियन टन क्षमता वाले इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस के उद्घाटन से कंपनी के लंबे उत्पादों का कारोबार और मजबूत होगा। निदेशक मंडल ने एनआईएनएल के टाटा स्टील में विलय को भी मंजूरी दे दी है, जिससे परिचालन में बेहतर तालमेल और कॉरपोरेट ढांचे का सरलीकरण होगा।
यूरोप में कंपनी के बदलाव की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि ब्रिटेन के पोर्ट टालबोट में 1.25 अरब पाउंड की लागत वाली इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस परियोजना का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। यह ब्रिटेन के इस्पात उद्योग के लिए कम कार्बन उत्सर्जन वाले उत्पादन की दिशा में सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक है और इसे ब्रिटेन सरकार के सहयोग से आगे बढ़ाया जा रहा है। वहीं नीदरलैंड में पर्यावरण संबंधी नियम यूरोपीय संघ के मानकों से भी अधिक कड़े हो गए हैं, जिससे कुछ पुराने संयंत्रों के संचालन में कठिनाइयां बढ़ी हैं। कंपनी डच सरकार और अन्य संबंधित पक्षों के साथ मिलकर दीर्घकालिक, पर्यावरण अनुकूल और आर्थिक रूप से व्यवहारिक समाधान तलाश रही है। ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए टाटा स्टील नीदरलैंड ने वैटनफॉल के को-जनरेशन पावर प्लांट का भी अधिग्रहण किया है।
चेयरमैन ने कहा कि ‘वन टाटा स्टील’ की अवधारणा के तहत कंपनी तकनीक और डिजिटल परिवर्तन पर तेजी से काम कर रही है। कंपनी ने उत्पादन से लेकर वितरण तक विभिन्न क्षेत्रों में 860 से अधिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित मॉडल लागू किए हैं, जिससे उत्पादन क्षमता, सुरक्षा और ऊर्जा दक्षता में सुधार हुआ है। कंपनी के डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘आशियाना’ और ‘डिजीईसीए’ का संयुक्त सकल व्यापार मूल्य बढ़कर 9,360 करोड़ रुपये हो गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 161 प्रतिशत अधिक है।
उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की सुरक्षा कंपनी की सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी इकाइयों में शून्य दुर्घटना के लक्ष्य के साथ काम किया जा रहा है। इसके लिए प्रक्रियाओं को और मजबूत बनाया जा रहा है तथा आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।
सामाजिक दायित्वों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 में कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) गतिविधियों पर 473 करोड़ रुपये खर्च किए, जिससे देशभर में लगभग 69 लाख लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा।
अपने संबोधन के अंत में चेयरमैन ने कहा कि टाटा स्टील इस समय बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है और कंपनी का लक्ष्य अधिक बड़ी, हरित, आधुनिक, तकनीक आधारित तथा मजबूत इस्पात कंपनी के रूप में आगे बढ़ना है। उन्होंने शेयरधारकों का कंपनी के निदेशक मंडल और प्रबंधन पर लगातार विश्वास बनाए रखने के लिए आभार व्यक्त किया तथा भविष्य में भी उनके सहयोग की अपेक्षा जताई।

