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Wed. Jul 1st, 2026

अनाथ मनमोहन को मिली नई उम्मीद, सरकारी योजना से जोड़ने की पहल

चाईबासा: सदर अस्पताल में पिछले एक महीने से हाथ जलने के कारण इलाजरत मंझारी प्रखंड के बिदरी पंचायत अंतर्गत पटाओते टोला निवासी अनाथ मनमोहन खंडाईत को अब मदद की उम्मीद जगी है। आर्थिक तंगी और पारिवारिक संकट से जूझ रहे मनमोहन और उसके छोटे भाई के लिए समाजसेवियों और प्रशासन ने सहायता की पहल शुरू की है।

जानकारी के अनुसार, मनमोहन के पिता का बचपन में ही निधन हो गया था। कुछ समय बाद उसकी मां भी दोनों बच्चों को छोड़कर चली गई। इसके बाद से दोनों भाइयों का पालन-पोषण उनकी वृद्ध दादी कर रही हैं। परिवार का गुजारा दादी को मिलने वाली वृद्धावस्था पेंशन और राशन कार्ड से मिलने वाले अनाज के सहारे हो रहा है। हाथ जलने के बाद से मनमोहन पिछले एक महीने से सदर अस्पताल में भर्ती है, जहां उसकी दादी लगातार उसकी देखभाल कर रही हैं।

इस परिवार की स्थिति सोशल मीडिया क्रिएटर बोंगा लागुरी की फेसबुक पोस्ट के माध्यम से सामने आई। मामला सामने आने के बाद समाजसेवी जितेंद्र गोप ने तत्काल संज्ञान लिया और पीएलबी रेणु देवी को इसकी जानकारी दी।

इसके बाद प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह डालसा अध्यक्ष मोहम्मद शाकिर तथा डालसा सचिव रवि चौधरी के मार्गदर्शन में डालसा की टीम सदर अस्पताल पहुंची। टीम ने मनमोहन और उसकी दादी से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी ली तथा हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया।

समाजसेवी जितेंद्र गोप ने बताया कि दोनों अनाथ भाइयों को समाज कल्याण विभाग की पालनकर्ता योजना से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। योजना के तहत दोनों बच्चों को चार-चार हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन दिलाने का प्रयास किया जाएगा, जिससे उनकी शिक्षा, भरण-पोषण और भविष्य को बेहतर बनाया जा सके।

समाजसेवियों और डालसा की इस पहल से मनमोहन और उसके परिवार को राहत की उम्मीद जगी है। स्थानीय लोगों ने भी इस मानवीय प्रयास की सराहना करते हुए जरूरतमंद परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने की अपील की है।

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