जमशेदपुर। पूर्वी सिंहभूम जिले के गोलमुरी थाना प्रभारी प्रशांत सिंह और सिदगोड़ा थाना में पदस्थापित टाइगर मोबाइल के जवान शम्स तबरेज खुर्शीद पर अवैध रूप से पैसे मांगने, लोगों को झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देने, युवकों को हिरासत में लेकर कथित तौर पर वसूली करने तथा मस्जिद परिसर में प्रवेश कर अभद्र व्यवहार करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। गोलमुरी वर्क्स फ्लैट निवासी व्यवसायी शेख नुमान ने इस संबंध में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत देने के साथ अदालत में सूचनात्मक याचिका दायर कर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।
करीब 29 वर्षीय शेख नुमान, पिता शेख आरिफ, गोलमुरी के क्वार्टर नंबर एफ-9/2 के निवासी हैं। उन्होंने अपनी याचिका में बताया है कि वह व्यवसाय करते हैं और नियमित रूप से वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का भुगतान करते हैं। उनका आरोप है कि पिछले कुछ दिनों से टाइगर मोबाइल के जवान शम्स तबरेज खुर्शीद उनसे अवैध रूप से पैसे की मांग कर रहे थे। आरोप है कि इस मामले में गोलमुरी थाना प्रभारी प्रशांत सिंह भी उनके साथ मिलकर दबाव बना रहे थे। व्यवसायी का कहना है कि पैसे नहीं देने पर झूठे मामले में फंसाकर जेल भेजने की धमकी दी जा रही थी।
शेख नुमान ने 22 अक्टूबर 2026 की घटना का उल्लेख करते हुए कहा है कि शाम करीब 7:30 से 7:55 बजे के बीच वह गोलमुरी मस्जिद में नमाज अदा करने गए थे। इसी दौरान थाना प्रभारी प्रशांत सिंह, सिपाही शम्स तबरेज खुर्शीद और अन्य पुलिसकर्मियों के मस्जिद परिसर में प्रवेश करने का आरोप लगाया गया है। याचिका के अनुसार, पुलिसकर्मी कथित तौर पर जूते पहने और हथियार लेकर परिसर में दाखिल हुए थे। वहां मौजूद नमाजियों ने धार्मिक स्थल की मर्यादा का ध्यान रखने का अनुरोध किया, लेकिन आरोप है कि इस दौरान पुलिसकर्मियों ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। व्यवसायी का दावा है कि घटना के समय उनके खिलाफ थाने में कोई शिकायत लंबित नहीं थी। उन्होंने मामले की जांच के लिए मस्जिद परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित कराने और संबंधित अधिकारियों से उसकी जांच कराने का अनुरोध किया है। हालांकि, याचिका में स्पष्ट किया गया है कि सीसीटीवी फुटेज याचिकाकर्ता के पास उपलब्ध नहीं है।
व्यवसायी ने अपनी शिकायत में गोलमुरी के अन्य युवकों से कथित वसूली के मामलों का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार, रिफ्यूजी कॉलोनी निवासी देवेंद्र सिंह उर्फ आई लव पंजाब, पिता सोहन सिंह, को आठ अक्टूबर को गोलमुरी बाजार से सिपाही शम्स तबरेज अपने साथ बाइक पर बैठाकर ले गए थे। आरोप है कि इसके बाद थाना प्रभारी और सिपाही ने देवेंद्र सिंह तथा उनके परिजनों से 50 हजार रुपये की मांग की। परिवार की ओर से पूरी रकम देने में असमर्थता जताने पर कथित तौर पर 15 हजार रुपये लेकर 11 अक्टूबर की रात उन्हें छोड़ा गया। व्यवसायी ने इस मामले की भी जांच कराने की मांग की है।
याचिका में दस अक्टूबर की एक अन्य घटना का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि थाना प्रभारी प्रशांत सिंह ने गोलमुरी निवासी बलराम सिंह, मोहित सिंह, गौतम सिंह, अंकित सिंह, रितिक सिंह उर्फ गोलू और गुलशन सिंह उर्फ सन्नी को बिना किसी उचित कारण के उठाकर थाने लाया था। आरोप है कि इन युवकों से पैसे की मांग की गई और कथित तौर पर 70 हजार रुपये लेने के बाद 11 अक्टूबर की रात करीब एक से दो बजे के बीच उन्हें छोड़ दिया गया। याचिकाकर्ता ने इन आरोपों की स्वतंत्र जांच कर संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका स्पष्ट करने का अनुरोध किया है।
शेख नुमान ने अपनी याचिका में यह भी दावा किया है कि जब प्रशांत सिंह टेल्को थाना प्रभारी के पद पर कार्यरत थे, तब भी सिपाही शम्स तबरेज के साथ मिलकर लोगों को कथित रूप से उठाने और पैसे लेकर छोड़ने की घटनाएं होती थीं। उन्होंने टेल्को थाना कांड संख्या 151/2021 का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के एक मामले में पश्चिम बंगाल निवासी आरोपी को कथित तौर पर बिना वारंट उसके घर से उठवाया गया था और बाद में एक लाख रुपये लेकर छोड़ा गया था। इन आरोपों की भी पुष्टि नहीं हुई है।
याचिका में 24 अक्टूबर की दो घटनाओं को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शेख नुमान का कहना है कि शिकायत दिए जाने की जानकारी के बाद उसी दिन सिपाही शम्स तबरेज खुर्शीद गोलमुरी थाना क्षेत्र में बिना वर्दी के सक्रिय थे। आरोप है कि रात में वह गोलमुरी स्थित उनके उस मकान में पहुंचे, जहां नवीनीकरण का काम चल रहा था, और जबरन प्रवेश कर दरवाजा तोड़ दिया। व्यवसायी के अनुसार, घर पर उनके नहीं मिलने के बाद सिपाही न्यू डेवलपमेंट एरिया स्थित उनकी जनरल स्टोर की दुकान पर पहुंचे, जहां कथित तौर पर उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की गई। उन्होंने इन घटनाओं की भी कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच कराने की मांग की है।
व्यवसायी ने अदालत को बताया है कि उन्हें आशंका है कि संबंधित पुलिसकर्मी अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल कर उन्हें झूठे आपराधिक मामलों में फंसा सकते हैं, गलत तरीके से गिरफ्तार करा सकते हैं और शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बना सकते हैं। उन्होंने कहा है कि वह किसी भी वैध जांच में सहयोग करने और सक्षम पुलिस अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने के लिए तैयार हैं।
याचिका के अनुसार, शेख नुमान ने 23 अक्टूबर को पुलिस महानिदेशक, झारखंड, रांची, कोल्हान के पुलिस उपमहानिरीक्षक और पूर्वी सिंहभूम के वरीय पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत देकर उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की थी। उन्होंने यह भी कहा है कि घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए गोलमुरी बस्ती के जिम्मेदार लोगों ने सार्वजनिक शांति और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के उद्देश्य से मामले को मीडिया और सामाजिक माध्यमों पर प्रसारित करने से परहेज किया था।
अदालत में दायर सूचनात्मक याचिका में शेख नुमान ने अनुरोध किया है कि उनकी याचिका को अभिलेख पर लिया जाए और उनकी आशंकाओं पर विचार करते हुए कानून के अनुसार उचित आदेश दिया जाए। उन्होंने सक्षम प्राधिकारी से गोलमुरी थाना की सामान्य डायरी की प्रविष्टियों, पुलिसकर्मियों की ड्यूटी सूची, आवागमन संबंधी अभिलेखों और घटनाओं की जानकारी रखने वाले लोगों के बयान की जांच कराने का भी आग्रह किया है। मामले में संबंधित अधिकारियों का पक्ष और पुलिस की ओर से की गई किसी कार्रवाई की जानकारी सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

