जमशेदपुर। साकची स्थित रामलीला मैदान में मंगलवार को आयोजित रामलीला में मुनि वशिष्ठ के अयोध्या आगमन तथा भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के वन गमन एवं ताड़का वध के प्रसंगों का मंचन किया गया। वृंदावन धाम से आए कलाकारों ने अपने अभिनय के माध्यम से रामायण के इन महत्वपूर्ण प्रसंगों को मंच पर जीवंत किया। रामलीला देखने पहुंचे श्रद्धालु भगवान श्रीराम की लीलाओं और आदर्शों से भावविभोर नजर आए।
मंचन के दौरान गुरुजनों के मार्गदर्शन, धर्म की रक्षा और समाज को भयमुक्त बनाने के संदेश को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। ताड़का वध के प्रसंग में दिखाया गया कि किस प्रकार भगवान श्रीराम ने ऋषि-मुनियों के यज्ञ और तपस्या में बाधा डालने वाली ताड़का का वध कर धर्म की रक्षा का दायित्व निभाया। इस प्रसंग के माध्यम से कलाकारों ने दर्शकों को संदेश दिया कि अन्याय और अधर्म के विरुद्ध खड़े होना तथा सत्य के मार्ग पर चलना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है।
रामायण के प्रसंगों के अनुसार, भगवान श्रीराम और लक्ष्मण ने गुरुजनों के आदेश का पालन करते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया। रामलीला के माध्यम से मर्यादा, आज्ञापालन, साहस और धर्म के प्रति समर्पण जैसे आदर्शों को भी दर्शाया गया। कलाकारों की भावपूर्ण प्रस्तुति ने रामायण की घटनाओं को दर्शकों के सामने सजीव रूप में रखा।
साकची रामलीला मैदान में आयोजित 104वें रामलीला उत्सव में वृंदावन धाम के कलाकार भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का मंचन कर रहे हैं। 10 से 20 अक्टूबर तक चलने वाले इस उत्सव में प्रतिदिन शाम 7:30 बजे से रामलीला का आयोजन किया जा रहा है। रामलीला के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम के आदर्शों, भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

