चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले के खुंटपानी प्रखंड के पुरुनियाँ गांव में अनाथ और बेसहारा बच्चों को सरकारी प्रायोजन योजना से जोड़ने को लेकर जागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान का उद्देश्य ऐसे बच्चों को भोजन, कपड़े, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना और उन्हें सरकारी योजना का लाभ दिलाना है।
बताया गया कि भारत सरकार और राज्य सरकार की ओर से मिशन वात्सल्य के तहत प्रायोजन योजना संचालित की जा रही है। इसके माध्यम से जोखिम भरी परिस्थितियों में रहने वाले, अनाथ तथा जरूरतमंद बच्चों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। योजना के तहत पात्र बच्चों को 1 से 18 वर्ष की आयु तक प्रतिमाह 4 हजार रुपये की सहायता दिए जाने का प्रावधान है। यह राशि बच्चे या उसके अभिभावक के बैंक खाते में भेजी जाती है।
प्रायोजन की राशि का उपयोग बच्चों के पौष्टिक भोजन, विद्यालय की फीस, यूनिफॉर्म, किताब-कॉपी, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक जरूरतों के लिए किया जा सकता है। इसमें ऐसे बच्चों को भी शामिल किया जा सकता है, जिनके माता-पिता नहीं हैं या जो एकल अभिभावक के साथ रह रहे हैं और विद्यालय में पढ़ाई कर रहे हैं।
योजना का लाभ लेने के लिए बच्चों के आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, निर्धारित आय सीमा से संबंधित प्रमाण पत्र, विद्यालय से सत्यापित बोनाफाइड प्रमाण पत्र तथा बच्चे और अभिभावक के दो-दो पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो सहित अन्य जरूरी दस्तावेज की आवश्यकता होती है।
अभियान से जुड़े लोगों ने बताया कि जानकारी के अभाव में कई जरूरतमंद परिवार सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। ऐसे परिवारों तक योजना की जानकारी पहुंचाकर पात्र बच्चों को इसका लाभ दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
इस मुहिम को सफल बनाने में प्रखंड प्रमुख सिद्धार्थ होनहागा, डालसा के पैरा लीगल वॉलंटियर्स अलकमा रूही, समाजसेवी बागुन उर्फ टाइगर होनहागा और सुमन होनहागा मौजूद रहे। उन्होंने लोगों से अपील की कि पात्र बच्चों और उनके परिवारों को योजना की जानकारी देकर आवश्यक दस्तावेज तैयार कराने में सहयोग करें, ताकि कोई भी जरूरतमंद बच्चा शिक्षा और जरूरी सुविधाओं से वंचित न रहे।

