जमशेदपुर।जुगो-जुग अटल धन-धन साहिब श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का 422वां प्रथम प्रकाश पर्व रविवार को साकची गुरुद्वारा साहिब में श्रद्धा, उल्लास एवं धार्मिक वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर विशेष कीर्तन दरबार का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में संगत ने गुरुद्वारा साहिब पहुंचकर गुरु ग्रंथ साहिब जी के समक्ष माथा टेका और सरबत के भले की अरदास की।
गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी, साकची के तत्वावधान में सिख स्त्री सत्संग सभा, सुखमणि साहिब कीर्तनी जत्था एवं सिख नौजवान सभा, साकची के सहयोग से आयोजित समागम में “बाणी गुरू, गुरू है बाणी विचि बाणी अंम्रितु सारे, गुरू बाणी कहै सेवकु जनु मानै परतखि गुरू निसतारे”, “सब सिक्खन को हुक्म है गुरु मान्यो ग्रन्थ”, “संता के कारज आप खलोआ हर काम करावण आया राम” तथा “साहिब मेरा एको है, एको है भाई एको है” सहित विभिन्न शबद-कीर्तन प्रस्तुत किए गए।
समागम की शुरुआत सुबह 10 बजे श्री अखंड पाठ साहिब की समाप्ति के भोग के साथ हुई। इसके बाद गुरु घर के रागियों एवं कथावाचकों ने गुरबाणी, शबद-कीर्तन एवं गुरमति विचारों के माध्यम से संगत को गुरु साहिब की शिक्षाओं से जोड़ा। इस अवसर पर श्री दरबार साहिब, अमृतसर के हजूरी रागी भाई साहिब भाई करमजीत सिंह ‘शाहबाद मारकंडा’ विशेष रूप से जमशेदपुर पहुंचे और अपनी मधुर गुरबाणी को वाद्य यंत्र वायलिन को धुन पर पिरोकर शबद-कीर्तन से संगत को निहाल किया। वहीं धर्म प्रचार कमिटी, अमृतसर के प्रचारक भाई जगदेव सिंह ‘तारागढ़’ ने भी गुरमति विचार साझा किए।
जमशेदपुर के युवा कीर्तनीये भाई गुरदीप सिंह ‘निक्कू’ तथा गुरुद्वारा साहिब साकची के हजूरी रागी भाई नारायण सिंह ने भी शबद-कीर्तन प्रस्तुत किया। गुरुद्वारा साहिब के मुख्य ग्रंथी भाई अमृतपाल सिंह मन्नण एवं जत्थेदार ज्ञानी जरनैल सिंह ने कथा एवं सिख इतिहास के माध्यम से संगत को गुरु ग्रंथ साहिब जी की महानता एवं गुरमत सिद्धांतों से अवगत कराया। समागम के अंत में सरबत के भले की अरदास के साथ संगत के लिए गुरु का अटूट लंगर बरताया गया।
गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी, साकची के प्रधान सरदार निशान सिंह ने कहा कि गुरु ग्रंथ साहिब जी केवल सिखों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए आध्यात्मिक मार्गदर्शक हैं।
कमिटी के महासचिव परमजीत सिंह काले ने कहा कि प्रथम प्रकाश पर्व संगत के लिए आत्मचिंतन और गुरु साहिब की शिक्षाओं से जुड़ने का पावन अवसर है। गुरु ग्रंथ साहिब जी की बाणी हमें सत्य, सेवा, विनम्रता, समानता और मानवता के मार्ग पर चलने का संदेश देती है।
गौरतलब है कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रथम प्रकाश वर्ष 1604 में श्री हरिमंदिर साहिब, अमृतसर में हुआ था। इसी ऐतिहासिक दिवस की स्मृति में दुनियाभर की सिख संगत श्रद्धा एवं उल्लास के साथ प्रथम प्रकाश पर्व मनाती है।
गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी, साकची के प्रधान निशान सिंह, महासचिव परमजीत सिंह काले के अलावा ट्रस्टी रबिन्दर सिंह, सतनाम सिंह सिद्धू, कोषाध्यक्ष बलबीर सिंह, रणधीर सिंह, शमशेर सिंह सोनी, अजायब सिंह बरियार, सतपाल सिंह राजू, सुखविंदर सिंह निक्कू, त्रिलोचन सिंह तोची, हरपाल सिंह सिद्धू, दलजीत सिंह, मनोहर सिंह मीते, बलवीर सिंह धंजल, गुरपाल सिंह, सुखदेव सिंह, जगमिंदर सिंह, सतवीर सिंह गोल्डू, सन्नी सिंह बरियार, राजिंदर सिंह, अमरपाल सिंह और हरविंदर सिंह के अलावा सिख स्त्री सत्संग सभा, साकची की प्रधान बीबी जतिंदरपाल कौर, सुखमणि साहिब कीर्तनी जत्था की बीबी राज कौर, सिख नौजवान सभा, साकची के अध्यक्ष रोहितदीप सिंह, मोनी रंधावा सहित अन्य ने समागम को सफल बनाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई।
*”बाणी गुरू, गुरू है बाणी विचि बाणी अमृत सारे …”* *साकची गुरुद्वारा में श्रद्धाभाव से मनाया गया गुरु ग्रंथ साहिब जी का 422वाँ प्रथम प्रकाश पर्व, उमड़ी संगत ने माथा टेक कर की सरबत के भले की अरदास*

