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खनन संशोधन विधेयक पर चंपाई सोरेन का सरकार पर हमला, बोले- छात्रों के आंदोलन से ध्यान भटकाने की कोशिश

जमशेदपुर। पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 को लेकर झारखंड सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में चल रहे छात्र आंदोलन से ध्यान हटाने के लिए सत्ताधारी दल खनन संशोधन विधेयक को लेकर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहा है। चंपाई सोरेन ने कहा कि विधेयक लागू होने के बाद राज्य को मिलने वाली रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम, जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) और राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट से होने वाली आय पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

चंपाई सोरेन ने कहा कि संशोधन के बाद यदि किसी राशि पर असर पड़ने की संभावना है तो वह अतिरिक्त सेस से संबंधित हो सकती है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2024-25 में सेस से करीब 1,380 करोड़ रुपये और 2025-26 में 7,486 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई थी। हालांकि, उन्होंने कहा कि भविष्य में इस पर वास्तविक प्रभाव क्या पड़ेगा, यह केंद्र सरकार की ओर से कानून लागू होने के बाद जारी किए जाने वाले दिशा-निर्देशों से स्पष्ट होगा।

उन्होंने सेस को टैक्स पर लगाया जाने वाला अतिरिक्त कर बताते हुए कहा कि जीएसटी लागू होने के दौरान भी कई तरह के सेस समाप्त किए गए थे। उनके मुताबिक केंद्र सरकार पूरे देश में टैक्स व्यवस्था को सरल बनाने की दिशा में काम कर रही है और खनन संशोधन कानून केवल झारखंड के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश में लागू होगा।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 में केंद्र में एनडीए सरकार के आने के बाद राज्यों की खनन से होने वाली आय में 354 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस अवधि में राज्यों को सात लाख करोड़ रुपये से अधिक प्राप्त हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान व्यवस्था में खनन क्षेत्र से मिलने वाले कुल राजस्व का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा राज्यों को मिलता है और संशोधन के बाद भी राज्यों को लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा मिलता रहेगा।

चंपाई सोरेन ने खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास को लेकर भी राज्य सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सेस के पीछे खनन प्रभावित इलाकों और विस्थापित लोगों के विकास की सोच रही होगी, लेकिन झारखंड में इसका अपेक्षित लाभ लोगों तक नहीं पहुंचा। उनका आरोप है कि प्रदूषण और विस्थापन की समस्या झेल रहे हजारों-लाखों परिवार आज भी बदहाल स्थिति में रहने को मजबूर हैं। उनका कहना था कि इस राशि का प्रभावी इस्तेमाल कर हर वर्ष सैकड़ों गांवों को स्मार्ट विलेज के रूप में विकसित किया जा सकता था।

अबुआ आवास और मईया सम्मान योजना को खनन सेस से जोड़ने पर भी चंपाई सोरेन ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अबुआ आवास योजना नवंबर 2023 में शुरू हुई थी, जबकि मईया सम्मान योजना की घोषणा जून 2024 में उनके कार्यकाल के दौरान हुई थी। उस समय सेस की राशि मिलने की कोई निश्चित संभावना नहीं थी, इसलिए इन योजनाओं को सेस की आय से जोड़ना उचित नहीं है।

उन्होंने राज्य सरकार के बजट खर्च पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि हर वर्ष सरकार के पास बड़ी राशि खर्च नहीं हो पाती है। उनके अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में 31,110 करोड़ रुपये, 2023-24 में 32,744 करोड़ रुपये और 2022-23 में 24,623 करोड़ रुपये खर्च नहीं किए जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार इन बची हुई राशि का इस्तेमाल जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए कर सकती है।

खनन क्षेत्र में कथित अनियमितताओं को लेकर भी चंपाई सोरेन ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG की रिपोर्टों में अवैध खनन से राज्य को हजारों करोड़ रुपये के नुकसान की बात सामने आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई पहाड़ों को अवैध खनन के जरिए खत्म कर दिया गया, DMFT में भी गड़बड़ियां हुईं और प्रवर्तन निदेशालय ने अवैध खनन से जुड़े मामलों में कार्रवाई की है, लेकिन सरकार ने इन मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया।

चंपाई सोरेन ने नगड़ी में भूमि अधिग्रहण के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि खुद को अबुआ सरकार कहने वाली सरकार गरीब आदिवासी और मूलवासी किसानों की जमीन पर बिना उचित भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के कब्जा करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति चिंताजनक है और प्रखंड से लेकर जिला स्तर तक भ्रष्टाचार से आम जनता परेशान है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकारी नौकरियों में कथित अनियमितताओं को लेकर भी सरकार पर हमला किया। उन्होंने कहा कि युवाओं और छात्रों में सरकार के प्रति असंतोष बढ़ रहा है। चंपाई सोरेन के मुताबिक पिछले तीन सप्ताह से रांची की सड़कों पर बड़ी संख्या में युवा और छात्र आंदोलन कर रहे हैं और सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर भी सरकार और उसके नेताओं को लेकर लोगों की नाराजगी दिखाई दे रही है। चंपाई सोरेन ने आरोप लगाया कि युवाओं, छात्रों और आम लोगों का भरोसा खो चुकी सरकार अब खनन संशोधन विधेयक को मुद्दा बनाकर वास्तविक समस्याओं से जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है।

चंपाई सोरेन ने कहा कि सरकारी संसाधनों के कथित दुरुपयोग, भ्रष्टाचार और तानाशाही से परेशान युवा, छात्र, किसान तथा आदिवासी-मूलवासी अब सरकार की कार्यशैली को समझ चुके हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है और आने वाले समय में प्रदेश की जनता सरकार के खिलाफ एकजुट होकर सड़कों पर उतर सकती है।

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