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‘स्वमान से जीवन में आती है सकारात्मक शक्ति, परिस्थितियों का सामना करना होता है आसान’ : सूरज भाई

जमशेदपुर। बिष्टुपुर स्थित लॉयला स्कूल ऑडिटोरियम में शनिवार को ब्रह्माकुमारी संस्थान के नियमित राजयोग साधकों के लिए आयोजित दो दिवसीय ‘ऊंची उड़ान—संपूर्णता की ओर’ राजयोग तपस्या शिविर का विधिवत शुभारंभ हुआ। उद्घाटन सत्र में अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय आबू रोड से पहुंचे वरिष्ठ राजयोगी ब्रह्माकुमार सूरज भाई ने कहा कि व्यक्ति अपने वास्तविक आत्मिक स्वरूप को पहचानकर स्वमान में स्थित हो जाए तो जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। उन्होंने कहा कि स्वयं को सर्वशक्तिमान परमपिता परमात्मा की संतान मानने का भाव मन को शक्ति देता है और कठिन परिस्थितियों में भी व्यक्ति को संतुलित रहने में सहयोग करता है।

सुबह करीब 9.30 बजे शुरू हुए शिविर के उद्घाटन अवसर पर दीप प्रज्वलन एवं कैंडल लाइटिंग की गई। कार्यक्रम में समाजसेवी पूर्विक होश, इंडस्ट्रियलिस्ट एवं समाजसेवी तरु बेन कमानी, एलआईसी के रीजनल मैनेजर मनोज कुमार, इंडस्ट्रियलिस्ट जितेंद्र अग्रवाल, आनंद सिंह सहित विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य लोग मौजूद रहे। लॉयला स्कूल के फादर प्रिंसिपल ने भी कार्यक्रम में शामिल होकर आयोजन की गरिमा बढ़ाई।

शिविर में जमशेदपुर के अलावा गया, हजारीबाग, रामगढ़, पटना, मुजफ्फरपुर, देवघर, कोलकाता, रांची, चांडिल, बलरामपुर और देवरिया सहित कई शहरों से करीब एक हजार राजयोग साधक पहुंचे हैं। सूरज भाई के साथ वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका गीता दीदी और रोहित भाई भी शिविर में विशेष रूप से शामिल हुए हैं।

प्रथम सत्र में सूरज भाई ने प्रतिभागियों को स्वमान की शक्ति का अनुभव कराया। उन्होंने ‘मैं सर्वशक्तिमान पिता की संतान हूं, मैं मास्टर सर्वशक्तिमान आत्मा हूं’ जैसे संकल्पों का अभ्यास कराया। उन्होंने कहा कि सकारात्मक संकल्पों का निरंतर अभ्यास मन को मजबूत बनाता है और व्यक्ति के व्यवहार एवं सोच में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद करता है। उनका कहना था कि जब व्यक्ति शुभ संकल्पों को अपने जीवन का आधार बनाता है तो वह स्वयं के साथ-साथ दूसरों के कल्याण के लिए भी बेहतर ढंग से कार्य कर पाता है।

शिविर के अगले सत्र में गीता दीदी ने क्षमा और कृतज्ञता को जीवन में आंतरिक शांति का आधार बताया। उन्होंने कहा कि किसी घटना या व्यक्ति के प्रति मन में नकारात्मक भाव बनाए रखने से मानसिक बोझ बढ़ता है। क्षमा का भाव इस बोझ को कम करने में सहायक होता है। उन्होंने प्रतिभागियों को यह भी समझाया कि दूसरों से तुलना करने के बजाय जीवन में मिली उपलब्धियों और परमात्मा की देन के प्रति कृतज्ञ रहना संतोष और खुशी को बढ़ाता है। इसके बाद उन्होंने राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास कराया।

शाम के सत्र में बीके अंजू दीदी ने ‘स्व-चेकिंग’ के माध्यम से आत्मचिंतन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति यदि नियमित रूप से अपने विचारों, व्यवहार और कर्मों की समीक्षा करे तो अपनी कमियों को पहचानकर उनमें सुधार कर सकता है। उन्होंने अच्छे विचारों, शुभ भावनाओं और सकारात्मक कर्मों को जीवन के सकारात्मक कर्मों के खाते को मजबूत करने वाला बताया। इसके बाद आपा बहन ने प्रतिभागियों को विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से अपने जीवन के अनुभवों पर विचार करने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में प्रतिभागियों से ऐसे अनुभव साझा करने को कहा गया, जब किसी को क्षमा करने या अपनी गलती स्वीकार कर माफी मांगने के बाद उनके मन को हल्कापन और खुशी महसूस हुई हो। संध्या सत्र में रोहित भाई ने परमात्मा के साथ का अनुभव करने की विधि समझाई। इसके बाद सूरज भाई ने विशेष कॉमेंट्री के माध्यम से राजयोग मेडिटेशन का गहन अभ्यास कराया।

समापन सत्र में गीता दीदी ने ईश्वरीय शांति एवं शुभकामनाओं की शक्ति का अनुभव कराया। उन्होंने प्रतिभागियों को मन के माध्यम से दूसरों के लिए शुभभावना और शक्ति भेजने का अभ्यास कराया। आयोजन में रागिनी दीदी, सुधा दीदी, पूनम दीदी, लक्ष्मी दीदी, उन्नति दीदी, रूबी दीदी, राजवंती बहन और शिवकन्या दीदी सहित कई वरिष्ठ राजयोग साधिकाएं उपस्थित रहीं। आयोजकों के अनुसार शिविर का उद्देश्य राजयोग साधकों को आत्मचिंतन, स्वमान, सकारात्मक सोच, क्षमा, कृतज्ञता और परमात्म-स्मृति के माध्यम से आत्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है।

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