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ब्रेन मलेरिया से छात्रा की मौत के बाद हरकत में स्वास्थ्य विभाग, विशेष जांच अभियान शुरू, निजी क्लिनिक को नोटिस

जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड में ब्रेन मलेरिया से एक छात्रा की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गया है। मामले को गंभीर मानते हुए सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने स्वतः संज्ञान लिया और पूरे घटनाक्रम की जांच के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्र में मलेरिया नियंत्रण के लिए व्यापक अभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

सिविल सर्जन के आदेश पर गठित विशेष स्वास्थ्य टीम ने शुक्रवार को छात्रा के गांव और पीएम श्री कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, पोटका में स्वास्थ्य जांच शिविर लगाया। शिविर के दौरान मलेरिया के लक्षण वाले 34 लोगों की जांच की गई, जिनमें एक व्यक्ति मलेरिया संक्रमित पाया गया। संक्रमित मरीज को तत्काल दवा उपलब्ध कराकर उपचार शुरू कर दिया गया।

स्वास्थ्य टीम ने विद्यालय परिसर का निरीक्षण भी किया। इस दौरान वार्डन रूमा हलधर के साथ बैठक कर छात्राओं के स्वास्थ्य, परिसर की साफ-सफाई और मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के उपायों की समीक्षा की गई। टीम ने विद्यालय प्रबंधन को नियमित स्वास्थ्य निगरानी और आवश्यक एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए।

उधर, जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ. मृत्युंजय धावड़िया ने आपात बैठक बुलाकर प्रभावित गांव में मलेरिया जांच, उपचार और इंडोर रेजिडुअल स्प्रे (आईआरएस) अभियान को और तेज करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए प्रत्येक संवेदनशील क्षेत्र में सतर्कता बढ़ाई जाए तथा नियमित जांच, साफ-सफाई और जनजागरूकता अभियान को प्रभावी ढंग से चलाया जाए।

बैठक में जिला भीबीडी सलाहकार, जिला कुष्ठ परामर्शी, पिरामल फाउंडेशन के प्रतिनिधियों सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारियों ने भी भाग लिया। सभी अधिकारियों को क्षेत्र में लगातार निगरानी रखने और संदिग्ध मरीजों की तत्काल जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने स्पष्ट कहा कि छात्रा की मौत के मामले में यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित व्यक्ति या संस्थान के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसी क्रम में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रजनी महाकुड़ ने सिविल सर्जन के निर्देश पर संबंधित निजी “निदान क्लिनिक” को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। क्लिनिक से दो दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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