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कोल्हान विश्वविद्यालय में “ब्हा सह सरहुल मिलन समारोह” का आयोजन

चाईबासा: कोल्हान विश्वविद्यालय के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग द्वारा विभागीय सभागार में “ब्हा सह सरहुल मिलन समारोह” का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में समाजसेवी, लेखक एवं कवि सोनू हेस्सा उपस्थित थे।

मुख्य अतिथि सोनू हेस्सा ने सरहुल और ब्हा को प्रकृति का पर्व बताते हुए कहा कि लोगों को प्रकृति के अनुकूल कार्य करना चाहिए और प्रकृति से प्रेम करना चाहिए, क्योंकि मानव जीवन पूरी तरह प्रकृति पर आधारित है। उन्होंने प्रकृति के सम्मान को सभी का कर्तव्य बताया।

कार्यक्रम के स्वागत भाषण में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग (हो) के विषय प्रभारी डॉ. बसंत चाकी ने कहा कि विभाग का संस्कृति से गहरा जुड़ाव है, इसलिए इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी भाषाई और सांस्कृतिक विरासत पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से शोध करने और समाज को नई दिशा देने की अपील की। साथ ही ब्हा पर्व की उत्पत्ति पर संक्षिप्त जानकारी दी।

अन्य वक्ताओं ने ब्हा पर्व को प्रकृति और फूलों का पर्व बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण में सहायक होते हैं।

कार्यक्रम का संचालन जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. सुभाष चंद्र महतो ने किया।

समारोह में विभाग के हो, कुड़माली और संथाली के छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक लोकगीत और लोकनृत्य प्रस्तुत किए, जिससे वातावरण सांस्कृतिक रंग में रंग गया।

इस अवसर पर हिन्दी विभागाध्यक्ष सरोज कुमार ने सरहुल को परिवर्तन और नई शुरुआत का पर्व बताया। इसके अलावा राजेश्वरी महांता (शोधार्थी), आर्चना कुमारी गुप्ता (विभागाध्यक्ष, दर्शनशास्त्र), संचिता भुइ सेंड (विभागाध्यक्ष, बंगला), डॉ. विजय कुमार (हिन्दी विभागाध्यक्ष), टीआरएल विभाग के शिक्षण सहायक रामदेव बोयपाई और दिकु हांसदा भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंत में टीआरएल विभागाध्यक्ष सह मानविकी संकायाध्यक्ष डॉ. तपन कुमार खांड़ा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

समारोह में विभाग के विद्यार्थियों की बड़ी संख्या में सहभागिता रही और कार्यक्रम हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ।

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