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सेरेंगसिया फुटबॉल मैदान की बदहाल स्थिति पर उठे सवाल, जिम्मेदार कौन?*

चाईबासा: कोल्हान के क्रांति वीर योद्धाओं की पवित्र भूमि माने जाने वाले ऐतिहासिक सेरेंगसिया फुटबॉल मैदान की वर्तमान स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। 2 फरवरी 2026 को जिला प्रशासन के दिशा-निर्देश पर झारखंड सरकार एवं स्थानीय आयोजन समिति द्वारा आयोजित कार्यक्रम के बाद मैदान की स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्यक्रम समाप्त होने के बाद मैदान में फैली गंदगी की अब तक समुचित सफाई नहीं कराई गई है। चारों ओर प्लास्टिक, कचरा और अवशेष फैले हुए हैं, जिससे आसपास के निवासियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इस गंदगी के कारण घरों के पालतू जानवर—मुर्गी, बकरी और गाय—प्लास्टिक खा रहे हैं, जिससे उनकी तबीयत बिगड़ रही है और कुछ मामलों में मौत भी हो चुकी है।

सेरेंगसिया मैदान को कोल्हान क्षेत्र के आदिवासियों की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा स्थल माना जाता है। ऐसे पवित्र स्थान की उपेक्षा को लेकर लोगों में गहरी नाराजगी है। आमजनों का कहना है कि कार्यक्रम आयोजित करने से पहले और बाद में स्वच्छता एवं संरक्षण की जिम्मेदारी प्रशासन और आयोजन समिति की थी, जिसे गंभीरता से नहीं निभाया गया।

यह क्षेत्र मानकी-मुण्डा के अधिकार क्षेत्र में आता है।

स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि मैदान की इस स्थिति पर मानकी-मुण्डा संघ ने अब तक कोई ठोस पहल क्यों नहीं की। लोगों का कहना है कि पारंपरिक व्यवस्था के तहत इस प्रकार के मामलों में स्थानीय नेतृत्व की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, लेकिन इस मुद्दे पर अपेक्षित सक्रियता दिखाई नहीं दे रही है।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से मांग की है कि अविलंब मैदान की साफ-सफाई कराई जाए, प्लास्टिक कचरे का समुचित निष्पादन हो तथा भविष्य में ऐसे आयोजनों के बाद स्थल की देखरेख की स्पष्ट जिम्मेदारी तय की जाए, ताकि ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर की गरिमा बनी रहे।

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