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मेयर की कुर्सी पर ‘परिवार बनाम पार्टी’ की जंग, मानगो-जुगसलाई में राजनीतिक प्रतिष्ठा दांव पर

जमशेदपुर। मानगो और जुगसलाई नगर निगम का मेयर चुनाव इस बार स्थानीय विकास से आगे बढ़कर राजनीतिक वर्चस्व, संगठनात्मक अनुशासन और पारिवारिक ताकत की सीधी भिड़ंत बन गया है। महिलाओं के लिए आरक्षित सीट ने भले ही महिला नेतृत्व को अवसर दिया हो, लेकिन जमीनी स्तर पर यह चुनाव उन राजनीतिक परिवारों की प्रतिष्ठा की लड़ाई में तब्दील होता दिख रहा है, जिनके पुरुष सदस्य वर्षों से सक्रिय राजनीति में प्रभाव रखते हैं।

मानगो में पूर्व मंत्री Banna Gupta अपनी पत्नी सुधा गुप्ता के पक्ष में खुलकर चुनावी मोर्चा संभाले हुए हैं। उनके समर्थक इसे कांग्रेस की प्रतिष्ठा से जोड़कर देख रहे हैं। दूसरी ओर भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष राजकुमार श्रीवास्तव ने अपनी पत्नी कुमकुम श्रीवास्तव को मैदान में उतारा, लेकिन प्रदेश नेतृत्व से टकराव के बाद मामला तूल पकड़ गया। झारखंड भाजपा के महामंत्री प्रदीप वर्मा द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस में उनसे यह स्पष्ट करने को कहा गया कि वे पार्टी लाइन का पालन करेंगे या पत्नी की उम्मीदवारी का समर्थन करेंगे।

इस घटनाक्रम के बाद राजकुमार श्रीवास्तव ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता और सभी दायित्वों से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि 45 वर्षों की सेवा के बावजूद उन्हें अपमानित किया गया। प्रेस वार्ता में उन्होंने पार्टी के कुछ नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए और न्यायालय जाने की बात कही। उनके साथ विकास सिंह भी मंच पर मौजूद रहे, जिन्होंने इसे पार्टी के भीतर लोकतांत्रिक संवाद की कमी बताया। इस घटनाक्रम ने भाजपा की स्थानीय इकाई में असंतोष को उजागर कर दिया है।

राज्य के मुख्यमंत्री Hemant Soren द्वारा महिलाओं के लिए आरक्षण को लेकर उठाए गए कदम की भी चुनावी चर्चा में बार-बार चर्चा हो रही है। सवाल उठ रहा है कि क्या यह आरक्षण वास्तविक महिला नेतृत्व को आगे लाने का माध्यम बन पा रहा है या फिर प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों के विस्तार का साधन बन रहा है।

जुगसलाई नगर निगम में भी मेयर पद को लेकर समीकरण कम दिलचस्प नहीं हैं। यहां नौशीन खान चुनाव मैदान में हैं, जिनके पति हेदायतुल्ला खान झामुमो से जुड़े प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। हालांकि पार्टी ने उन्हें आधिकारिक समर्थन नहीं दिया है, फिर भी उनका राजनीतिक नेटवर्क चुनाव को प्रभावित कर रहा है। डॉली मल्लिक के पीछे उनके पति मानिक मल्लिक की सक्रियता देखी जा रही है। बलबीर कौर के समर्थन में उनके पति शैलेंद्र सिंह, जो सिख समाज में प्रभाव रखते हैं, चुनावी रणनीति में जुटे हैं।

इसके अलावा नीलूफर भी मेयर पद की प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं। रिंकू सिंह भी मैदान में हैं, जिनकी पृष्ठभूमि अपेक्षाकृत गैर-राजनीतिक मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रिंकू सिंह को छोड़ अधिकांश प्रत्याशियों के पीछे मजबूत सामाजिक और राजनीतिक आधार वाले परिवार खड़े हैं, जिससे मुकाबला और अधिक बहुआयामी हो गया है।

मानगो और जुगसलाई का चुनाव इस बार दलीय सीमाओं से आगे निकलकर ‘परिवार की राजनीतिक विरासत’ बनाम ‘पार्टी अनुशासन’ की बहस का केंद्र बन गया है। एक ओर भाजपा आंतरिक अनुशासन और आधिकारिक समर्थन की लाइन पर कायम रहने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी ओर कांग्रेस और अन्य दल इसे अपनी-अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रहे हैं।

मतदान सिर्फ मेयर का फैसला नहीं करेगा, बल्कि यह भी संकेत देगा कि स्थानीय राजनीति में मतदाता पार्टी की आधिकारिक रणनीति को तरजीह देते हैं या प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों की पकड़ को। यह चुनाव आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों से पहले शहरी राजनीतिक समीकरणों की दिशा भी तय कर सकता है।

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