जमशेदपुर। साकची स्थित श्री रामलीला मैदान में श्री रामलीला उत्सव ट्रस्ट के तत्वावधान में श्री राम-कृष्ण मित्र मंडल द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन शनिवार को भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की अविरल धारा बही। व्यासपीठ से वृंदावन धाम से पधारे पूज्य संत श्री स्वामी सर्वानंद जी महाराज ने श्रीमद्भागवत महापुराण की दिव्य महिमा का विस्तारपूर्वक वर्णन करते हुए कहा कि भागवत केवल ग्रंथ नहीं, बल्कि स्वयं भगवान का साक्षात स्वरूप है, जिसके श्रवण मात्र से जीव का कल्याण होता है।
महाराज श्री ने श्रीकृष्ण लीला का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। श्री गोवर्धन पूजा प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि जब भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के अहंकार का हरण कर ब्रजवासियों की रक्षा की, तब यह संदेश दिया कि परमात्मा अपने भक्तों की रक्षा हेतु सदैव तत्पर रहते हैं। झूला उत्सव और छप्पन भोग की झांकी का वर्णन करते समय पूरा पंडाल “राधे-राधे” और “गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो” के जयघोष से गूंज उठा।
कथा के क्रम में विदुर-मैत्रेय मिलन संवाद का मार्मिक प्रसंग सुनाते हुए महाराज श्री ने बताया कि जब जीव सत्य की खोज में विनम्र होकर प्रश्न करता है, तब उसे दिव्य ज्ञान की प्राप्ति होती है। उन्होंने मनु-शतरूपा की संतानों, सनकादि ऋषियों के शाप से जय-विजय के हिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु के रूप में अवतार, तथा भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि भक्ति मार्ग में बाधाएं आती हैं, किंतु सच्चा भक्त कभी विचलित नहीं होता।
देवहूति और कपिल भगवान के उपदेश का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने सांख्य दर्शन का सार समझाया। दक्ष प्रजापति के अहंकार और भगवान शिव के प्रसंग को सुनाते हुए उन्होंने कहा कि अहंकार ही पतन का कारण है, जबकि समर्पण ही उत्थान का मार्ग है। ऋषभदेव चरित्र और पुनर्जन्म के सिद्धांत पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि मानव जीवन दुर्लभ है और इसे भगवद् भक्ति में लगाना ही सच्ची सफलता है।
अजामिल कथा, गजेन्द्र मोक्ष और हरि अवतारों का वर्णन करते हुए महाराज श्री ने समझाया कि अंतिम समय में भी यदि सच्चे हृदय से भगवान का स्मरण किया जाए तो मोक्ष संभव है। देवासुर संग्राम, समुद्र मंथन और वामन भगवान की कथा के माध्यम से उन्होंने धर्म और अधर्म के संघर्ष का आध्यात्मिक अर्थ स्पष्ट किया।
सूर्यवंश में भगवान श्रीराम के जन्म और चंद्रवंश में भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण की बधाई गीतों के साथ पूरा पंडाल भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालु भावविभोर होकर भजन-कीर्तन में झूमते रहे।
आज के यजमान के रूप में गोपी बाबू, शंकर लाल सिंघल, अनिल अग्रवाल एवं श्याम अग्रवाल सपत्नीक पूजा में शामिल हुए और विधिवत आरती कर कथा का पुण्य लाभ प्राप्त किया। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि प्रतिदिन सायं भव्य आरती, पुष्पवर्षा और प्रसाद वितरण किया जा रहा है।
कथा स्थल को आकर्षक फूलों एवं विद्युत सज्जा से सजाया गया है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु परिवार सहित कथा श्रवण हेतु पहुंच रहे हैं। संत श्री ने अंत में कहा कि श्रीमद्भागवत का श्रवण मनुष्य के जीवन में शांति, प्रेम और सदाचार का संचार करता है तथा समाज को आध्यात्मिक दिशा प्रदान करता है।

