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Wed. Feb 11th, 2026

झारखंड में 32% बाल विवाह अब भी जारी, 2029 तक बाल विवाह मुक्त राज्य बनाने का लक्ष्य — यूनिसेफ

रांची।* झारखंड में बाल विवाह की स्थिति अभी भी चिंताजनक है। यूनिसेफ के अनुसार, राज्य में अब भी लगभग 32 प्रतिशत बच्चों का विवाह कम उम्र में हो जाता है। इसे खत्म करने के लिए यूनिसेफ ने 2029 तक झारखंड को बाल विवाह मुक्त राज्य बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

इसी कड़ी में सोमवार को रांची के विश्वा प्रशिक्षण केंद्र में यूनिसेफ द्वारा “किशोर सशक्तिकरण और बाल विवाह उन्मूलन” विषय पर एक कार्यशाला आयोजित की गई। इस परामर्श सत्र में सामाजिक संगठनों, सरकारी प्रतिनिधियों, बाल पत्रकारों और किशोर-किशोरियों ने भाग लिया।

यूनिसेफ झारखंड की प्रमुख डॉ. कनीनिका मित्र ने कहा कि सरकार राज्य और जिला स्तर पर बाल विवाह रोकने के लिए कार्य योजनाएं चला रही है। इसके तहत लड़कियों की शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, किशोरों के स्वास्थ्य, पोषण और भागीदारी को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि बीते वर्षों में स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन अब भी राज्य में 32 प्रतिशत बाल विवाह हो रहे हैं। यूनिसेफ सरकार के साथ मिलकर किशोर-केंद्रित सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों को और मजबूत करने की दिशा में कार्यरत है।

यूनिसेफ इंडिया की चीफ ऑफ फील्ड सर्विसेज सोलेडैड हेरेरो ने कहा कि किशोरावस्था जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण दौर है। यदि इस अवस्था में शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास पर ध्यान दिया जाए, तो समाज को दीर्घकालिक सामाजिक और आर्थिक लाभ मिल सकते हैं। उन्होंने कहा कि बाल विवाह जैसी प्रथाओं को समाप्त करना स्थायी विकास की दिशा में जरूरी कदम है।

इस अवसर पर झारखंड महिला विकास सोसायटी की निदेशक किरण कुमारी पासी ने कहा कि सरकार बाल विवाह समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि लड़कियां अपनी शिक्षा पूरी करें और उन्हें गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य व आजीविका के अवसर मिलें।

कार्यशाला में सरकारी विभागों, सामाजिक संस्थाओं और सीएसआर भागीदारों ने वर्ष 2029 तक बाल विवाह मुक्त झारखंड के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सामूहिक रणनीति पर चर्चा की।

इस मौके पर यूनिसेफ इंडिया की सोलेडैड हेरेरो, यूनिसेफ झारखंड प्रमुख डॉ. कनीनिका मित्र, जिला शिक्षा अधीक्षक बादल राज, जेएसएलपीएस के सुवाकांता नायक और पूर्णिमा मुखर्जी, तथा यूनिसेफ विशेषज्ञ प्रीति श्रीवास्तव, आस्था अलंग, जोशिला पलापति और पारुल शर्मा उपस्थित रहे।

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