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Fri. Mar 6th, 2026

रेलवे बोर्ड की मंजूरी से दक्षिण पूर्व रेलवे में कई ट्रेनों का प्रायोगिक ठहराव, फरवरी से होगा लागू

चक्रधरपुर। रेलवे बोर्ड द्वारा दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) के अंतर्गत चलने वाली कई एक्सप्रेस ट्रेनों को विभिन्न स्टेशनों पर प्रायोगिक ठहराव (Experimental Stoppage) की मंजूरी दे दी गई है। यह व्यवस्था अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी। बुधवार को रेलवे प्रशासन द्वारा दी गई अनुसार यात्रियों की सुविधा और क्षेत्रीय मांग को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। अलग-अलग ट्रेनों के लिए यह ठहराव फरवरी 2026 के मध्य से चरणबद्ध रूप से लागू होगा।

मंजूरी के अनुसार टाटानगर-बक्सर एक्सप्रेस (18183) और बक्सर-टाटानगर एक्सप्रेस (18184) को अनारा स्टेशन पर ठहराव दिया गया है। टाटानगर-बक्सर एक्सप्रेस अनारा में सुबह 10.09 बजे पहुंचेगी और 10.10 बजे प्रस्थान करेगी, जबकि बक्सर-टाटानगर एक्सप्रेस दोपहर 14.37 बजे पहुंचेगी और 14.38 बजे रवाना होगी। यह सुविधा 10 फरवरी 2026 से प्रभावी होगी।

डिघा-आसनसोल एक्सप्रेस (13505) और आसनसोल-डिघा एक्सप्रेस (13506) को चंद्रकोणा रोड, गड़बेटा, सालबनी, छातना और ओंडाग्राम स्टेशनों पर प्रायोगिक ठहराव दिया गया है। इन स्टेशनों पर दोनों ट्रेनों के ठहराव 15 फरवरी 2026 से लागू होंगे। इससे पश्चिम मेदिनीपुर और बांकुड़ा क्षेत्र के यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा।

रांची-गोड्डा एक्सप्रेस (18603) और गोड्डा-रांची एक्सप्रेस (18604) को झालिदा स्टेशन पर ठहराव की मंजूरी दी गई है। रांची-गोड्डा एक्सप्रेस 14 फरवरी 2026 से जबकि गोड्डा-रांची एक्सप्रेस 12 फरवरी 2026 से यहां रुकेगी।

टाटानगर-कटिहार एक्सप्रेस (28181) और कटिहार-टाटानगर एक्सप्रेस (28182) को जॉयचंडी पहाड़ स्टेशन पर प्रायोगिक ठहराव दिया गया है। टाटानगर-कटिहार एक्सप्रेस का ठहराव 11 फरवरी 2026 से और कटिहार-टाटानगर एक्सप्रेस का ठहराव 10 फरवरी 2026 से प्रभावी होगा।

इसके अलावा भुवनेश्वर-नई दिल्ली तेजस राजधानी एक्सप्रेस (20817) और नई दिल्ली-भुवनेश्वर तेजस राजधानी एक्सप्रेस (20818) को पुरुलिया स्टेशन पर ठहराव की अनुमति दी गई है। भुवनेश्वर-नई दिल्ली राजधानी 14 फरवरी 2026 से और नई दिल्ली-भुवनेश्वर राजधानी 16 फरवरी 2026 से पुरुलिया में रुकेगी।

रेलवे अधिकारियों ने बताया कि यह सभी ठहराव प्रायोगिक आधार पर दिए गए हैं और यात्रियों की प्रतिक्रिया व यात्री संख्या के आधार पर आगे निर्णय लिया जाएगा। इन ठहरावों से छोटे एवं मध्यम स्टेशनों के यात्रियों को लंबी दूरी की ट्रेनों से बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी और क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलेगी।

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