जमशेदपुर। पंचम राज्य वित्त आयोग, झारखंड ने शनिवार को पूर्वी सिंहभूम जिले का दौरा कर जिला परिषद, जेएसएलपीएस और मनरेगा से जुड़ी योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। समाहरणालय सभागार में आयोजित बैठक की अध्यक्षता आयोग के अध्यक्ष अमरेंद्र प्रताप सिंह ने की, जिसमें उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी, जिला परिषद अध्यक्ष बारी मुर्मू, उपाध्यक्ष पंकज, उप विकास आयुक्त नागेंद्र पासवान समेत जिला स्तरीय अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
बैठक में ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों के माध्यम से चल रही योजनाओं की प्रगति का आकलन करते हुए आयोग ने स्पष्ट किया कि पंचायतों को अधिक अधिकार, संसाधन और जिम्मेदारी देकर ही वास्तविक स्वशासन को मजबूत किया जा सकता है। आयोग का फोकस पंचायत उन्नति सूचकांक में सुधार और साक्ष्य आधारित नीति निर्माण पर है ताकि ग्राम पंचायत से लेकर जिला परिषद तक की संस्थाएं आत्मनिर्भर बन सकें।
जेएसएलपीएस और मनरेगा की समीक्षा के दौरान आयोग अध्यक्ष ने कहा कि महिला सशक्तिकरण और आजीविका बढ़ाने में स्वयं सहायता समूहों की बड़ी भूमिका हो सकती है। उन्होंने निर्देश दिया कि अधिक से अधिक महिलाओं को समूहों से जोड़कर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा जाए तथा केसीसी और अन्य ऋण सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया कि कोई भी महिला सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से वंचित न रहे।
किसानों की आय बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक, समग्र और बाजार आधारित खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। आम की खेती के साथ इंटरक्रॉपिंग अपनाने तथा उन्नत किस्म के आम, अनार, शरीफा, अमरूद और चीकू की बागवानी को प्रोत्साहित करने की बात कही गई। साथ ही बागवानी, पशुपालन, मशरूम उत्पादन, कुक्कुट पालन और पारंपरिक हस्तकला जैसी गतिविधियों को आजीविका से जोड़ते हुए उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बेहतर मार्केटिंग व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए गए।
आयोग ने कहा कि सरकार की हर योजना में पंचायत की भागीदारी अनिवार्य होनी चाहिए। पंचायतों में विभिन्न समितियों की नियमित बैठक और उनकी मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने को कहा गया। सभी विभागों को पंचायतों को मिले अधिकारों की जानकारी रखने और आम नागरिकों को भी उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने का निर्देश दिया गया।
जिला परिषद की आय बढ़ाने पर विशेष जोर देते हुए उपलब्ध परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग और रखरखाव, दुकानों का यथोचित किराया निर्धारण तथा क्यूआर कोड के माध्यम से ऑनलाइन किराया वसूली लागू करने को कहा गया। बाजार, हाट और सैरात की विधिवत बंदोबस्ती कर राजस्व बढ़ाने तथा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला परिषद सदस्यों के प्रशिक्षण का प्रस्ताव भी सामने आया।
बैठक में जिला परिषद सदस्यों ने अपना मानदेय बढ़ाने, पिछले दो वर्षों से लंबित फंड जारी करने, अनुशंसित योजनाओं को स्वीकृति दिलाने और डीएमएफटी फंड में परिषद की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग रखी। साथ ही परिषद को नए आंतरिक संसाधन सृजित करने के लिए अधिक अधिकार देने का मुद्दा भी उठाया गया।
समग्र रूप से आयोग ने पंचायतों और जिला परिषद को प्रशासनिक, वित्तीय और कार्यात्मक रूप से सशक्त बनाने, महिलाओं और किसानों की आय बढ़ाने, स्थानीय संसाधनों से राजस्व सृजन करने और योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता व तकनीक के उपयोग को अनिवार्य रूप से लागू करने के स्पष्ट निर्देश दिए।

