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Wed. Feb 4th, 2026

कोर्ट के आदेश पर फिल्मी हस्तियों समेत कई पर एफआईआर, 8 लाख की ठगी का आरोप

जमशेदपुर । साकची थाना में अदालत के निर्देश पर एक चर्चित निवेश घोटाले से जुड़े मामले में नई प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस एफआईआर में फिल्म अभिनेता गोविंदा, चंकी पांडेय, शक्ति कपूर, गायक एवं अभिनेता मनोज तिवारी के साथ मेक्सीजोन टच प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के निदेशक चंद्रभूषण सिंह और उनकी पत्नी प्रियंका सिंह को आरोपी बनाया गया है। कंपनी के दोनों निदेशक पहले से ही न्यायिक हिरासत में हैं।

यह मामला बर्मामाइंस थाना क्षेत्र निवासी जसपाल सिंह की शिकायत पर दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उन्होंने कंपनी की निवेश योजना से प्रभावित होकर 8 लाख रुपये जमा किए थे। कंपनी की ओर से उन्हें 15 प्रतिशत प्रतिमाह तक रिटर्न का आश्वासन दिया गया था, लेकिन निवेश के बाद न तो मूलधन वापस मिला और न ही कोई ब्याज दिया गया। जसपाल सिंह का कहना है कि कंपनी के प्रचार-प्रसार और बड़े कार्यक्रमों में नामी कलाकारों की मौजूदगी देखकर उन्हें कंपनी पर भरोसा हुआ और उन्होंने अपनी जमा पूंजी लगा दी।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार मेक्सीजोन टच प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ पहले भी साकची थाना में धोखाधड़ी से संबंधित मामला दर्ज हो चुका है। अब कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुई नई एफआईआर से जांच की दिशा फिर से तेज होने की संभावना है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि कंपनी ने निवेशकों को लुभाने के लिए भव्य इवेंट आयोजित किए, जिनमें उक्त कलाकारों ने मंच साझा किया और लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया।

कंपनी के निदेशक चंद्रभूषण सिंह और उनकी पत्नी प्रियंका सिंह को करीब एक वर्ष पूर्व बिहार के वैशाली जिले से गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद से दोनों जेल में बंद हैं और उन पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता के आरोपों की जांच चल रही है।

आरोपों के मुताबिक कंपनी पर 600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि हड़पने का संदेह है। बताया जाता है कि इस कथित घोटाले से 25 हजार से ज्यादा निवेशक प्रभावित हुए हैं। कंपनी का मुख्य कार्यालय जमशेदपुर के साकची इलाके में संचालित होता था, जहां से पूरे नेटवर्क का संचालन किया जाता था।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि ताजा एफआईआर में नामजद सभी आरोपों की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जाएगी। कलाकारों की भूमिका को लेकर भी यह देखा जाएगा कि क्या वे केवल ब्रांड प्रमोशन तक सीमित थे या निवेश के लिए सीधे तौर पर लोगों को प्रोत्साहित किया गया था। जांच एजेंसियां कार्यक्रमों के वीडियो, विज्ञापन सामग्री, अनुबंध और भुगतान के रिकॉर्ड खंगाल सकती हैं।

फिलहाल यह मामला अदालत के संज्ञान में आने के बाद एक बार फिर चर्चा में है। आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट और सबूतों के आधार पर तय होगी।

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