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Sat. Feb 7th, 2026

कैरव गांधी अपहरण मामला बना सियासी मुद्दा, भाजपा ने सरकार को घेरा

जमशेदपुर। बिष्टुपुर के सीएच एरिया निवासी कारोबारी देवांग गांधी के पुत्र कैरव गांधी के अपहरण को 12 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक पुलिस को कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है। इस बीच यह मामला केवल पुलिसिया जांच तक सीमित न रहकर झारखंड की राजनीति के केंद्र में आ गया है। कैरव की सुरक्षित बरामदगी न होने से परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है, वहीं विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने राज्य सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

शुक्रवार को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेशानंद गोस्वामी बिष्टुपुर स्थित सर्किट हाउस एरिया पहुंचे और कैरव गांधी के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी। इस दौरान नवनियुक्त जिला अध्यक्ष संजीव सिन्हा भी उनके साथ मौजूद रहे। नेताओं ने परिवार से बातचीत कर अब तक की पुलिस कार्रवाई की जानकारी ली और हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया।

परिजनों से मिलने के बाद भाजपा नेताओं ने डीआईजी और एसएसपी से फोन पर बातचीत की। इसके पश्चात मीडिया से बात करते हुए नेताओं ने हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोला। प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कहा कि राज्य की कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि अपराध बेलगाम हो चुके हैं और आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उनका कहना था कि पुलिस महज औपचारिकताएं निभा रही है और अपराधियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है। आदित्य साहू ने यह भी घोषणा की कि 27 जनवरी को वे स्वयं डीजीपी से मुलाकात कर इस मामले में त्वरित और निर्णायक कार्रवाई की मांग करेंगे।

पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि 11 से अधिक दिन बीत जाने के बावजूद किसी तरह की ठोस जानकारी न मिलना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने इस मामले की सीबीआई जांच की मांग करते हुए कहा कि सच्चाई सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी है। वहीं अर्जुन मुंडा ने कहा कि प्रशासनिक शिथिलता के कारण पीड़ित परिवार न्याय से वंचित हो रहा है, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

कैरव गांधी के अपहरण का मामला अब कानून-व्यवस्था से आगे बढ़कर एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। एक ओर परिवार अपने बेटे की सुरक्षित वापसी की आस लगाए बैठा है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष सरकार पर दबाव बनाते हुए इस प्रकरण को लेकर आंदोलनात्मक रुख अपनाने के संकेत दे रहा है।

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