जमशेदपुर /पोटका
पोटका के धीरोल पंचायत अंतर्गत नुतनडीह गांव मे आदिवासी भूमिज समाज के द्वारा माघ महीने के पहली सोमवार को माघ बुरु पर्व का आयोजन धूमधाम से किया गया। यह माघ बुरू पर्व के बाद ही जंगल के नया फूल, फल, और नया पत्ता से बना हुआ पत्तल , दोंगा बना के खाना, खाने का परंपरा है। माघ बुरू पूजा आदिवासी भूमिज समाज के संस्कृति परंपरा का विरासत है, क्योंकि माघ पूजा के बाद ही नए पुराने घरों की छावनी किया जाता है ओर शुभ विवाह के लिए, देखा- देखी के लिए शुभ यात्रा का प्रारंभ किया जाता है। इस पूजा के बाद से ही नुतनडीह गांव में शादी दिया गया बेटी -बहन, पीठा, मुड़ी ओर इलिचाटु लेकर माईके आते है और जितना लेकर आता है माईके से भी वैसे लेकर जाते हैं। ये बहुत ही महत्वपूर्ण परंपरा जिंदा रखा गया है। ईस माघबुरू पूजा के दिन खेती-बाड़ी की चर्चा होती है और मजदूरी भी, साल भर का निर्धारण किया जाता है। ईस पर्व में नाया बृहस्पति सरदार, देउरी पटल सरदार, कुड़ाम नाया गुरुपद सरदार, के द्वारा सुख शांति एवं समृद्धि के लिए गांव के जायरा स्थान में साल वृक्ष के नीचे विधिवत पूजा पाठ किया जाता है । मौके पर सिद्धेश्वर सरदार, रामेश्वर सरदार, कार्तिक सरदार,दादा कान्त सरदार, विष्णु सरदार भागीरथी सरदार, रिंकू सरदार, भैरव सरदार, सुभाष सरदार ,राजू सरदार, अनिल सरदार, जयराम सरदार, रुहिया सरदार, काली पद सरदार, चंद्र मोहन सरदार, श्रीपति सरदार, के साथ काफी संख्या में नुतनडीह गांव के ग्रामीण लोग उपस्थित रहे।
वाईट —सिद्धेश्वर सरदार।
वाईट—रामेश्वर सरदार।

