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Fri. Feb 6th, 2026

साझी विरासत और शिक्षा से ही मजबूत होगा समाज: सरयू राय

जमशेदपुर। रविवार को जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने आदित्यपुर, सिदगोड़ा और सोनारी में आयोजित विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेते हुए क्षत्रिय समाज की गौरवशाली विरासत, साझा सांस्कृतिक चेतना और शिक्षा के महत्व पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की मजबूती उसकी ऐतिहासिक चेतना, आपसी एकता और भावी पीढ़ी की शिक्षा से तय होती है।

आदित्यपुर में झारखंड क्षत्रिय संघ के बैनर तले आयोजित परिवार मिलन समारोह में सरयू राय ने कहा कि क्षत्रिय समाज का इतिहास अतुलनीय है। धर्म, समाज, देश और संस्कृति की रक्षा के लिए संघर्ष का जो गौरवशाली अध्याय क्षत्रियों ने रचा है, वह आज भी प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज के लोग अपने अतीत से जुड़ते हैं और उसी के आधार पर वर्तमान और भविष्य के लिए अपनी भूमिका तय कर पाते हैं। अपनी परंपराओं, विरासत और इतिहास को याद करना आत्मबल को मजबूत करता है। सरयू राय ने कहा कि चाहे भविष्य में समाज और व्यवस्था का स्वरूप कैसा भी हो, क्षत्रिय समाज की विरासत हमेशा गर्व का विषय रहेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि आज के समय में समाज में जो संघर्ष और प्रतिस्पर्धा दिखाई देती है, उसकी तुलना क्षत्रिय समाज के उस त्याग और पराक्रम से नहीं की जा सकती, जिसने इतिहास को दिशा दी। कई बार शासक वर्ग अपने लिए प्रचार के साधन जुटाता है, लेकिन इतिहास में ऐसे भी उदाहरण हैं, जहां समाज ने अपने महापुरुषों के योगदान को स्वयं सहेज कर रखा और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया।

इसके बाद सिदगोड़ा टाउन हॉल में चंद्रवंशी एकता मंच के तत्वावधान में आयोजित वनभोज कार्यक्रम में सरयू राय ने चंद्रवंशी समाज की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि चंद्रवंशी समाज महाराज जरासंध को अपना प्रतीक पुरुष मानता है। जरासंध की वीरता और व्यक्तित्व प्रशंसनीय रहे हैं, लेकिन हमें पूरे उस कालखंड को साझा विरासत के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने जरासंध, कंस, श्रीकृष्ण, कुंती और भीष्म पितामह से जुड़ी ऐतिहासिक कड़ियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये सभी एक ही समय और परंपरा से जुड़े हुए हैं। अलग-अलग वंशों में बंटकर देखने के बजाय इन सबको साझा विरासत के रूप में स्वीकार करना जरूरी है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि साझा विरासत को मजबूत किए बिना सनातन संस्कृति की रक्षा संभव नहीं है। यदि सनातन संस्कृति कमजोर हुई, तो हमारे महापुरुषों और उनके आदर्शों को भी भुला दिया जाएगा।

सोनारी स्थित ट्राइबल कल्चर सेंटर में आयोजित कानू समाज के वनभोज कार्यक्रम में सरयू राय ने शिक्षा को भविष्य की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि कानू विकास संघ से उनका पुराना आत्मीय रिश्ता रहा है और यह समाज इसलिए आगे बढ़ रहा है क्योंकि यहां बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। कार्यक्रम में जिन बच्चों को सम्मानित किया गया, उन्होंने 95 प्रतिशत तक अंक प्राप्त कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है, जो समाज की सही दिशा को दर्शाता है। सरयू राय ने कहा कि उन्होंने वर्षों से देखा है कि इस समाज में बच्चों और बच्चियों का शिक्षा के प्रति लगाव लगातार बढ़ रहा है। भविष्य में वही समाज अपना हक प्राप्त करेगा, जो शिक्षित होगा। शिक्षा ही विकास का सबसे सशक्त हथियार है और जो पढ़ेगा, वही आगे बढ़ेगा।

इन तीनों कार्यक्रमों में सरयू राय ने सामाजिक एकता, सांस्कृतिक चेतना और शिक्षा को समाज के समग्र विकास का आधार बताते हुए लोगों से साझा विरासत और भावी पीढ़ी के निर्माण पर गंभीरता से विचार करने का आह्वान किया।

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