नोवामुंडी। पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुंडी प्रखंड में जंगली हाथियों के भीषण कहर के बाद राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा स्वयं घटनास्थल पर पहुंचे और शोकसंतप्त परिवारों से मिलकर उन्हें ढांढस बंधाया। उन्होंने पीड़ितों से कहा कि इस कठिन समय में वे अकेले नहीं हैं और उन्हें न्याय व सहायता दिलाने के लिए वे प्रशासन से लेकर सरकार तक आवाज उठाएंगे। मधु कोड़ा ने भरोसा दिलाया कि मृतकों के परिजनों को अविलंब मुआवजा दिलाने के साथ-साथ भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
मंगलवार रात नोवामुंडी प्रखंड की जेटेया पंचायत अंतर्गत बावड़िया मुंडा टोला में जंगली हाथियों का झुंड गांव में घुस आया। अचानक हुए हमले में एक ही परिवार के चार सदस्यों को हाथियों ने कुचलकर मार डाला। इसी दौरान बड़ापसिया टोला (डुगुड़ वसा) में हाथियों के हमले में एक अन्य ग्रामीण मंगल बोबोंगा की भी मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना से पूरे क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है और ग्रामीण भय के साये में जीने को मजबूर हैं।
घटना की जानकारी मिलते ही बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा प्रभावित गांवों में पहुंचे। उन्होंने मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर गहरी संवेदना व्यक्त की और कहा कि यह केवल एक परिवार या गांव की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की पीड़ा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रशासन की लापरवाही के कारण ग्रामीणों की जान जा रही है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
मधु कोड़ा ने मौके से ही वन विभाग के रेंजर से दूरभाष पर बातचीत कर मृतकों के परिजनों को तत्काल सरकारी मुआवजा देने, क्षेत्र में हाथियों की निगरानी बढ़ाने और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सोलर फेंसिंग, अलर्ट सिस्टम और वनकर्मियों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
इस अवसर पर नोवामुंडी मंडल अध्यक्ष चंद्र मोहन गोप, मीडिया प्रभारी विनित कुमार गोप, निखिलेश बोबोंगा, सुखराम कोड़ा, पीतांबर बोबोंगा, लक्ष्मण गोप सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे। ग्रामीणों ने भी पूर्व मुख्यमंत्री के समक्ष हाथी-मानव संघर्ष से स्थायी निजात दिलाने और पीड़ित परिवारों को जल्द राहत देने की मांग रखी।

