जमशेदपुर। जमशेदपुर के केबुल टाउन क्षेत्र में स्थित श्रीलक्ष्मीनारायण मंदिर (पूर्ववर्ती बिड़ला मंदिर) के जीर्णोद्धार कार्य के तेज़ होने के साथ ही इलाके में सकारात्मक माहौल बनता दिख रहा है। जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने बुधवार को जारी अपने बयान में कहा कि मंदिर के पुनरुद्धार से न केवल धार्मिक चेतना सशक्त हुई है, बल्कि केबुल कंपनी में पुनः औद्योगिक गतिविधियों के आरंभ होने की संभावनाएँ भी प्रबल हुई हैं।
सरयू राय ने कहा कि मंदिर परिसर में श्रीलक्ष्मीनारायण, माँ काली, भगवान शिव, श्री गणेश और पवनपुत्र हनुमान जी के विग्रह स्थापित होने तथा नियमित पूजा-अर्चना प्रारंभ होने के बाद लंबे समय से व्याप्त नकारात्मक वातावरण समाप्त हुआ है। इसके परिणामस्वरूप मंदिर जीर्णोद्धार में आ रही बाधाएँ दूर हुई हैं और केबुल कंपनी के पुनः चालू होने के संकेत भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं।
उन्होंने बताया कि मंदिर में भगवान विष्णु के दशावतार के विग्रह का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है और अब उसका रंग-रोगन किया जाना शेष है। इसके साथ ही गर्भगृह के चारों कोनों में सनातन संस्कृति के चार महान स्तंभ—महर्षि विश्वामित्र, महर्षि जमदग्नि, महर्षि कश्यप और महर्षि वाल्मीकि—की प्रतिमाएँ भी स्थापित कर दी गई हैं। उनके अनुसार, संभवतः यह देश का पहला लक्ष्मीनारायण मंदिर है, जहाँ गर्भगृह प्रांगण में भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी के साथ दशावतार और चार महर्षियों की प्रतिमाएँ एक साथ विराजमान हैं।
विधायक ने यह भी जानकारी दी कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मंदिर की बाउंड्री वॉल का निर्माण कार्य प्रगति पर है। वहीं मंदिर परिसर के भव्य गोपुरम की मरम्मत तथा गोपुरम शिखर पर पीतल के पाँच कलश स्थापित करने का कार्य भी चल रहा है। इसके पश्चात गर्भगृह के सामने विशाल फर्श का निर्माण किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को दर्शन में सुविधा मिल सके।
सरयू राय ने मंदिर परिसर में विराजमान देवी-देवताओं से प्रार्थना करते हुए कहा कि जिस प्रकार मंदिर जीर्णोद्धार में आ रही बाधाएँ दूर हुई हैं, उसी प्रकार केबुल कंपनी के पुनः संचालन के मार्ग में आने वाली सभी अड़चनों को भी दूर किया जाए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आवश्यकता पड़ने पर मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अनुष्ठान का आयोजन किया जा सकता है।
उन्होंने विश्वास जताया कि श्रीलक्ष्मीनारायण मंदिर में विराजमान देवी-देवताओं की कृपा से न केवल मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य शीघ्र पूर्ण होगा, बल्कि केबुल कंपनी में फिर से आर्थिक गतिविधियाँ आरंभ होंगी और केबुल टाउन क्षेत्र अपनी पुरानी रौनक और चहल-पहल के साथ पुनः गुलज़ार होगा।

